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मेरे पक्ष को खत्म करने पर तुली हैं यशोमति

रिपा महासचिव डॉ. राजेंंद्र गवई का आरोप

तिवसा से स्वबल पर लडने तैयार
राज्यपाल नियुक्त सदस्य बनने में कोई रुचि नहीं
फ्रंट डोर से जाउंगा, बैक डोर से नहीं
बालासाहब, कवाडे, आठवले को रिपब्लिकन एकता का भी खुला ऑफर
मेरे पास बाबासाहब की ओरिजनल पार्टी
अमरावती – /दि.16 रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के नेता डॉ. राजेंद्र गवई ने आज दोपहर आरोप लगाया कि, कांग्रेस नेता यशोमति ठाकुर और उनकी पार्टी हमारे पक्ष को खत्म करने पर तुली हैं. यह हम कतई सहन नहीं करेंगे. वक्त पडा तो भाजपा-शिंदे गुट के साथ गठजोड भी कर सकते हैं. ऐसे ही अपने बलबूते भी चुनाव में लडकर ताकत दिखा सकते हैं. अपने कांग्रेस नगर स्थित बंगले पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में डॉ. गवई ने तिवसा विधानसभा क्षेत्र से यशोमति ठाकुर के विरुद्ध चुनाव लडने की तैयार भी दर्शायी. उन्होंने राज्यपाल नामित विधान परिषद सदस्य बनाये जाने की खबर को अफवाह बताया और कहा कि, ऐसी खबरें छपती रहती हैं. उनका बैक डोर राजनीति में इंटरेस्ट नहीं. वे फ्रंट डोर से विधानमंडल या संसद का सदस्य बनना पसंद करेंगे. प्रेसवार्ता में डॉ. गवई के साथ रिपा के अनेक प्रमुख नेता उपस्थित थे. उनमें पूर्व सभापति विष्णु कुर्‍हाडे, अर्जुन खंडारे, प्रवीण डोंगरदीवे, अनिल गवई, दीपक सरदाया, भारत वानखडे, राहुल गवई, साहेबराव भालेराव, पी. सी. खंडारे आदि शामिल हैं.
शिंदे, बावनकुले से मिला
डॉ. गवई ने आरंभ में ही स्पष्ट किया कि, भाजपा के नये प्रदेशाध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, मंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता सुधीर मुनगंटीवार से हाल में उनकी पारिवारिक मुलाकात हुई. गणपति के भोजन के लिए भी वे गये थे. राजनीतिक चर्चा हुई. किंतु राज्यपाल नामित सदस्य बनने का न तो ऑफर आया और न वे बनने वाले हैं.
कांगे्रस से नाराज
डॉ. गवई कांग्रेस के स्थानीय नेताओं से बडे नाराज दिखाई दिये. खास कर यशोमति ठाकुर के प्रति उनका रोष अधिक दिखाई दिया. डॉ. गवई ने कहा कि, यशोमति का जन्म भैयासाहब ठाकुर के परिवार में हुआ हैं. उन्हें नेहरु और इंदिरा गांधी के विचार बढाना हैं. मेरा जन्म दादासाहब गवई के घर में हुआ हैं. मुझे बाबासाहब आंबेडकर के विचार बढाना हैं. जबकि कांग्रेस ने हमेशा बाबासाहेब आंबेडकर के विचार खत्म करने की कोशिश की हैं. ऐसा जारी है. इसलिए हम भी इंदिरा-नेहरु के विचार खत्म करके दिखा देंगे.
1979 की दिलाई याद
डॉ. गवई ने इतिहास के पन्ने उलटते हुए दावा किया कि, कांग्रेस द्बारा बाबासाहेब आंबेडकर की रिपब्लिकन पार्टी की अवहेलना के कारण ही 1979 में उनके पिता दादासाहब ने हरिभाउ कलोती के साथ मिलकर चुनाव में कमलताई गवई को मैदान में उतारा था. 1996 में भी दादासाहब ने कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लडा था और अमरावती लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस तीसरे नंबर पर खिसक गई थी. आज भी रिपा में वह ताकत है कि, जिले की एक लोकसभा और विधानसभा की 8 सीटों को पंजा मुक्त कर सकती हैं.
कोई संभ्रम नहीं
डॉ. गवई ने कांग्रेस के साथ सम्मानजनक गठजोड की तैयारी दर्शायी. वहीं यह भी कहा कि, भाजपा ने अच्छा ऑफर दिया, तो वे भाजपा के साथ भी तालमेल कर सकते हैं. पत्रकारों ने पूछा कि, यह संभ्रमावस्था नहीं है क्या? तो उन्होंने जवाब दिया कि, आज महाराष्ट्र का राजकारण अलग स्थिति में आ गया हैं. कांग्रेस शिवसेना के साथ तालमेल कर सकती है, तो वे भी बीजेपी के साथ जा सकते हैं.
संविधान को खतरा नहीं
एक प्रश्न के उत्तर में राजेंद्र गवई ने कहा कि, मोदी के आने से संविधान खतरे मेें होने का कांग्रेस का आरोप निराधार है, बल्कि यह गब्बर सिंग के डर के समान कांग्रेस इसका उपयोग कर रही है. मोदी 8 वर्षों से सत्ता में हैं. संविधान को कोई आंच नहीं आयी. आगे आएगी भी नहीं. ऐसे ही देश के डॉ. आंबेडकर के विचार भी कोई नहीं मिटा सकेगा.
रिपब्लिकन पार्टी एकता के लिए तैयार
डॉ. गवई ने कहा कि, उनकी रिपब्लिकन पार्टी ओरिजनल है. इसके कोष्टक में कोई अ, ब, क,ड नहीं हैं. रिपब्लिकन एकता और बाबासाहेब के विचारों को आगे ले जाने के लिए वे रिपा की बागडोर बालासाहब आंबेडकर, रामदास आठवले, प्रा. जोगेंद्र कवाडे को सौंपने के लिए तैयार हैं. समाचार लिखे जाने तक डॉ. गवई का मीडिया से संवाद चल रहा था.

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