नाबालिग से दुराचार मामले में दो आरोपियों को सश्रम कारावास

दोनों आरोपियों में एक महिला आरोपी का भी समावेश

* मुख्य आरोपी को 10 वर्ष की कैद व आर्थिक जुर्माना
* महिला आरोपी को 6 महिने की कैद और जुर्माना
* 4 आरोपी सबूतो के अभाव में हुए बाईज्जत बरी
अमरावती /दि.12- स्थानीय मोर्शी रोड पर शिवाजी नगर स्थित श्रद्धानंद होस्टल में पढनेवाली कक्षा 8 वीं की 15 वर्षीय नाबालिग छात्रा के साथ लैंगिग प्रताडना करने के साथ ही दुराचार किए जाने के मामले की सुनवाई करते हुए स्थानीय तृतीय जिला व सत्र न्यायाधीश यशवंत आनंद गोस्वामी की अदालत ने मुख्य आरोपी गणेश इंगोले को अधिकतम 10 वर्ष के सश्रम कारावास तथा 30 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई. साथ ही महिला सह आरोपी को 6 माह के कारावास व 2 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई गई. जबकि इस मामले में नामजद रहनेवाले 4 अन्य आरोपियों के खिलाफ अपराध साबित नहीं होने के चलते अदालत ने उन्हें बरी कर दिया. इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक सरकारी अभियोक्ता एड. सोनाली सुबोध क्षीरसागर व एड. पंकज इंगले ने बेहद सफल व प्रभावी युक्तिवाद किया.
इस्तगासे के मुताबिक यह घटना 13 दिसंबर 2012 को घटित हुई थी. उस समय जिले के एक ग्रामीण इलाके में रहनेवाली 15 वर्षीय नाबालिग छात्रा श्री शिवाजी शिक्षा संस्था द्वारा संचालित श्रद्धानंद होस्टल में रहते हुए कक्षा 8 वीं की पढाई कर रही थी. उस होस्टल में छात्रावास की अधीक्षिका अलका डिके व चौकीदार गणेश इंगोले सहित सहायक भास्कर सराटे व रुखमा पोटे भी काम करते हुए रहा करते थे. आरोप के मुताबिक घटना वाले दिन से कुछ पहले दीपावली पर्व के आसपास पीडिता अपनी मां को फोन लगाने हेतु चौकीदार गणेश इंगोले के पास गई थी, तो गणेश इंगोले ने उसके सीने व पेट पर अश्लील तरीके से स्पर्श करते हुए जोर-जबरदस्ती करने का प्रयास किया था और जब पीडिता ने चीखपुकार मचाने का प्रयास किया, तो गणेश इंगोले ने उसे जान से मार देने की धमकी देते हुए चुप रहने के लिए कहा था. इसके अगले ही दिन इस घटना की एक बार फिर पुनरावृत्ति हुई, जब पीडिता अपनी मां को फोन लगाने के लिए पहुंची, तो गणेश इंगोले ने पीडिता का जबरन चुंबन लिया और उसे अपने साथ अपने गांव चलने के लिए कहा. यह बात पीडिता ने अपनी एक सहेली को बताई. जिसने उसे पूरा वाकया उसकी मां को बताने के लिए कहा. पश्चात जब पीडिता की मां उसे मिलने के लिए श्रद्धानंद होस्टल पहुंची, तो पीडिता ने अपनी मां को पूरा वाकया बताया. जिसके बाद पीडिता की मां ने होस्टल की अधीक्षिका अलका डिके से मुलाकात करते हुए उन्हें पूरी घटना की जानकारी दी. साथ ही शिवाजी शिक्षा संस्था के तत्कालीन सचिव के पास होस्टल में रहनेवाली 16 छात्राओं के साथ पहुंचकर लिखित तौर पर शिकायत दर्ज कराई. लेकिन इसके बावजूद संस्था द्वारा इस मामले में चौकीदार गणेश इंगोले के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई.
वहीं इसके बाद 13 दिसंबर को होस्टल में ही रहनेवाली कक्षा 5 वीं की एक छात्रा ने पीडिता को बताया कि, उसकी मां का फोन कॉल आया है, तो पीडिता अपनी मां से बात करने हेतु फोन रिसीव करने के लिए पहुंची, जहां पर गणेश इंगोले पहले से मौजूद था. जिसने उसे बताया कि, फोन कट हो गया है और 5 मिनट बाद दुबारा कॉल आएगी. जिसके चलते पीडिता काफी देर तक अपनी मां की फोन कॉल आने का इंतजार करती रही. लेकिन कोई फोन कॉल नहीं आई. इसी दौरान गणेश इंगोले ने अपने कमरे का परदा गिराया और पीडिता को अपने चंगूल में पकडते हुए उससे जबरन शारीरिक संबंध बनाए. इसी दौरान होस्टल में रहनेवाली एक छात्रा ने यह पूरा वाकया अपनी आंखों से देखा और अपने कमरे में रहनेवाली कक्षा 10 वीं की छात्राओं को बताया. वहीं आरोपी गणेश इंगोले ने पीडिता को 30 रुपए देते हुए इस घटना के बारे में किसी से कुछ नहीं कहने हेतु धमकाया. लेकिन पीडिता सहित होस्टल में रहनेवाली कक्षा 10 वीं की कुछ छात्राओं ने पूरा वाकया होस्टल की अधीक्षिका अलका डिके को बताया और वे सभी श्री शिवाजी शिक्षा संस्था के तत्कालीन अध्यक्ष के घर पहुंचे. जिन्होंने मौखिक शिकायत लेने की बजाए लिखित तौर पर शिकायत लाकर देने की बात कही. जिसके चलते अगले दिन पीडिता सहित उसके साथ पढनेवाली एक अन्य छात्रा ने संस्था के तत्कालीन अध्यक्ष के नाम लिखित तौर पर शिकायत दी. जिसके आधार पर गाडगे नगर पुलिस ने भादंवि की धारा 376 व 506 (ब) सहित एट्रासीटी एक्ट की धारा 3 (1) (2) के तहत अपराधिक मामला दर्ज करते हुए कुल 6 आरोपियों को नामजद किया और मामले की जांच करते हुए स्थानीय अदालत में चार्जशीट पेश की.
इस मामले की सुनवाई दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 17 गवाह पेश किए गए. जिनमें पीडिता व उसकी मां सहित प्रत्यक्षदर्शी गवाह रहनेवाली होस्टल की छात्राओं ने अभियोजन पक्ष का पूरा साथ दिया. वहीं कई गवाह संस्था से संबंधित थे, जो आगे चलकर अपने बयानों व गवाही से मुकर भी गए. हालांकि इसके बावजूद अभियोजन पक्ष द्वारा किए गए जबरदस्त युक्तिवाद के चलते अदालत ने करीब 8 वर्ष के अंतराल पश्चात इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी चौकीदार गणेश इंगोले व सहआरोपी छात्रावास अधीक्षिका अलका डिके को दोषी करार दिया. साथ ही मुख्य आरोपी गणेश इंगोले को पोक्सो कानून की धाराओं के तहत 10 वर्ष के सश्रम कारावास व 25 हजार रुपए के जुर्माने तथा भादंवि की धाराओं के तहत 3 वर्ष के सश्रम कारावास व 5 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई. जुर्माना अदा नहीं करने पर आरोपी को 6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा. वहीं इस मामले में सहआरोपी रहनेवाली अधीक्षिका अलका डिके को अदालत ने भादंवि की धारा 202 व पोक्सो कानून की धारा 21 के तहत 6 माह के कारावास व 2 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई. जुर्माना अदा नहीं करने पर आरोपी को 15 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा. इसके अलावा अदालत ने पीडिता को नुकसान भरपाई के तौर पर 20 हजार रुपए दिए जाने का आदेश जारी करते हुए दोनों आरोपियों को निर्देशित किया कि, वे जुर्माने के अलावा 20 हजार रुपए की रकम पीडिता को अदा करें.
इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक सरकारी अभियोक्ता एड. सोनाली क्षीरसागर व एड. पंकज इंगले ने सफल युक्तिवाद किया. जिन्हें कोर्ट पैरवी अधिकारी अरुण हटवार व विनोद कनोजिया ने सहयोग किया.

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