होली पर पहली बार अभूतपूर्व स्थिति

बंद रहेंगे मंदिरों के पट

* कल चंद्रग्रहण
अमरावती/दि.2 – ग्रस्तोदित चंद्रग्रहण के कारण भारतवर्ष में पहली बार रंगोत्सव में खलल पडने जा रहा है. पुरोहितों ने आज दहन के बावजूद होली का रंगोत्सव परसों 4 मार्च को खेलने की बात कही है. इस बीच चंद्रग्रहण के सूतक और ग्रहण काल की वजह से कल मंगलवार तडके से संध्या 7 बजे तक शहर के प्रमुख मंदिरों के पट बंद रहेंगे.
अंबादेवी और एकवीरा देवी सहित तिरुपति बालाजी मंदिर, सतीधाम, रामदेव बाबा मंदिर, संकट मोचन हनुमान मंदिर, घंटाघर हनुमान मंदिर, रवि नगर हनुमान मंदिर, चांगापुर, महारुद्र मारुती सभी मंदिरों में पट बंद रहेंगे. संध्या आरती 7 बजे पश्चात होगी.
बॉक्स/फोटो- हवेली मंदिर
* बालकृष्णलाल हवेली मंदिर की सूचना
रायली प्लॉट स्थित बालकृष्णलाल गोवर्धन हवेली मंदिर में मंगला दर्शन मंगलवार तडके 4.30 बजे, होलीका दहन सुबह 5 बजे, डोल के दर्शन सुबह 7 बजे होंगे. उसी प्रकार हवेली मंदिर की गादीपति परमपूज्य गोस्वामी पुरुषोत्तमलालजी महाराज श्री की आज्ञा से हवेली के मैनेजिंग ट्रस्टी प्रदीप भाई वैद्य ने बताया कि, विक्रम संवत 2082, फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा, मंगलवार ता. 03/03/2026 के दिन ग्रस्तोदित चंद्रग्रहण का स्पर्श दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर होगा तथा ग्रहण मोक्ष सायं 6 बजकर 47 मिनट पर होगा. जहाँ चंद्रोदय 6 बजकर 40 मिनट से पूर्व होगा, वहाँ ग्रहण का पालन करना है. सोमवार पिछली रात्रि के 3 बजे 52 मिनट से वैध लगे हैं. सोमवार को पिछली रात्रि के 3 बजे 52 मिनट के पूर्व ही भोजन किया जायेगा. मंगलवार के दिन 6 बजे 52 मिनट के पूर्व ही जल पिया जायेगा. बिना जनेऊ के बालक तथा छोटी कन्या मंगलवार दिन के 6 बजे 52 मिनट पूर्व ही प्रसाद ले सकेंगे. दिन दिनके 12 बजे पर्यंत दोलोत्सव की सब सेवा पहुंच लेनी फेर चालू सेवा क्रम राखि दोपहर के 2 बजे 30 मिनट के पूर्व संध्या आरती पर्यंत की सेवा पहुंच लेनी विलम्ब होय तो दूधघर को भोग धरनोराजभोग की सखड़ी गायन को जाय. रसोई बालभोग आदि सब स्थल तथा पात्रन की शुद्धि करनी तथा सर्वत्र दर्भ धरनो जारी बीड़ा पट वस्त्र सो उठावने दर्शन खोलि के जपादि करनो. सायं 5 बजे 4 मिनट के पीछे श्री के आगे दान को संकल्प करनो. खिचड़ी को डवरा घृत दक्षिणा सहित प्रायः सर्वत्र दियो जाय है.मोक्ष समय पीछे चार पांच मिनट ठहर के स्नानादिक करके जनोई कंठी बदल के शुद्ध होय नवीन जल सूं झारीजी भरने. श्री कूं स्नान कराय के ग्रहण पीछे को भोग तथा शयन भोग संग ही धरनो. तदनन्तर नित्य क्रमानुसार सेवा पहोचनी. यथाशक्ति ब्राह्मण भोजन वैष्णव भोजनपूर्वक प्रसाद लेनो.

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