वैनगंगा-नलगंगा तथा शक्तिपीठ प्रोजेक्ट साबित होंगे गेमचेंजर
किसानों को सिंचाई हेतु पानी व भाविकों को दर्शन हेतु यात्रा की होगी सुविधा

अमरावती/दि.17 – राज्य सरकार द्वारा साकार किए जा रहे वैनगंगा-नलगंगा नदी जोड प्रकल्प तथा शक्तिपीठ महामार्ग आनेवाले समय में विदर्भ के लिए गेमचेंजर साबित हो सकते है. इन दोनों प्रकल्पों के पूरा हो जाने के बाद जहां एक ओर किसानों को सिंचाई के लिए भरपूर मात्रा में पानी उपलब्ध होगा, वहीं दूसरी ओर भाविक श्रद्धालुओं को राज्य के मुख्य शक्तिपीठों सहित अन्य धार्मिक स्थलों का दर्शन करने हेतु यात्रा की सुविधा उपलब्ध होने के साथ ही उनकी यात्रा बेहद आसान हो जाएगी.
बता दें कि, वैनगंगा-नलगंगा प्रकल्प के तहत भंडारा जिले के गोसीखुर्द बांध से 73.20 टीएमसी पानी को 388 किमी की लंबाई वाली नहर से बहाकर ले जाया जाएगा. जिसका विदर्भ क्षेत्र की 38 तहसीलों में रहनेवाले किसानों को खेती की सिंचाई के लिए लाभ होगा और वर्धा, यवतमाल, नागपुर, अमरावती, अकोला, बुलढाणा, वाशिम व भंडारा जिलो के किसानों के पास पूरे सालभर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध रहेगा. इस प्रकल्प के जरिए अमरावती जिले के 86,509 हेक्टेअर, नागपुर जिले के 81,879 हेक्टेअर, वर्धा जिले के 77,301 हेक्टेअर, अकोला जिले के 73,868 हेक्टेअर, बुलढाणा जिले के 39,016 हेक्टेअर, वाशिम जिले के 20,818 हेक्टेअर, यवतमाल जिले के 13 हजार हेक्टेअर तथा भंडारा जिले के 11,890 हेक्टेअर कृषि क्षेत्र को सिंचित करने की योजना है.
इस प्रकल्प में 32 नए बांध बनाए जाएंगे. साथ ही 18 पुराने बांधों में से 10 बांधों की उंचाई बढाई जाएगी. परियोजना के तहत गोसीखुर्द बांध में उपलब्ध अतिरिक्त जल को कालवों और सुरंगों के जरिए पश्चिमी विदर्भ तक पहुंचाया जाएगा. करीब 388 किमी लंबा मुख्य नहर बनाई जाएगी और 13 सुरंगों के माध्यम से पानी का प्रवाह सुनिश्चित होगा. लगभग 64 टीएमसी पानी कृषि, पेयजल और उद्योगों के लिए उपलब्ध होगा. विशेषज्ञों के अनुसार, इस परियोजना से किसानों को एक के बजाय 2-3 फसलें लेने का अवसर मिलेगा. सिंचाई के अभाव में पिछड़े क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ेगा. औद्योगिक निवेश को भी पानी की उपलब्धता से बढ़ावा मिलेगा. ग्रामीण अर्थव्यवस्था में स्थायी सुधार संभव होगा. सरकार का दावा है कि यह परियोजना विदर्भ के जल संकट को काफी हद तक दूर कर सकती है.
* केंद्र की मदद से पूरा होगा प्रोजेक्ट
राज्य सरकार इस परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिलाने की कोशिश कर रही है, ताकि केंद्र से वित्तीय सहायता मिल सके. प्रस्ताव के अनुसार, 60% फंड केंद्र और 40% राज्य द्वारा वहन किया जा सकता है. सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अगले 10 वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा है. फिलहाल यह विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक मंजूरियों के चरण में है. वैनगंगा-नलगंगा नदी जोड़ परियोजना केवल एक सिंचाई योजना नहीं, बल्कि विदर्भ के लिए जल, कृषि और औद्योगिक विकास का आधार बन सकती है. अगर समय पर फंडिंग, पर्यावरणीय मंजूरी और पुनर्वास के मुद्दे सुलझते हैं, तो यह परियोजना क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदलने वाली साबित हो सकती है.
* 865 किमी के शक्तिपीठ महामार्ग से विदर्भ को मिलेगी ‘शक्ति’
जहां एक ओर राज्य सरकार द्वारा विदर्भ क्षेत्र के सिंचाई अनुशेष को दूर करते हुए पानी के मामले में विदर्भ को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है. वहीं दूसरी ओर विदर्भ क्षेत्र में आवागमन व सडक परिवहन की सुविधा को भी सुदृढ करने का काम किया जा रहा है. बता दें कि, राज्य सरकार द्वारा पवनार से पत्रादेवी के बीच 865 किमी की लंबाई वाले शक्तिपीठ महामार्ग का निर्माण किया जा रहा है. पहले इस महामार्ग की लंबाई 803 किमी थी, परंतु कुछ जिलो में भूसंपादन का विरोध होने के चलते महामार्ग के नक्शे में कुछ जगहों पर बदलाव किए जाने की वजह से महामार्ग की लंबाई बढ गई और अब नए प्रस्ताव के अनुसार यह महामार्ग 12 जिलों की बजाए 13 जिलों के 395 गांवों से होकर गुजरेगा. जिसमें से 150 से अधिक गांवों में जमीन की नापजोख की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है.
– विशेष उल्लेखनीय है कि, यह महामार्ग विदर्भ के वर्धा व यवतमाल जिलों से होकर गुजरनेवाला है. जिसके चलते वैदर्भिय भाविक-श्रद्धालुओं हेतु शक्तिपीठों की दर्शन यात्रा करने के लिहाज से यह महामार्ग काफी सुविधापूर्ण साबित होगा. साथ ही साथ इससे यात्री परिवहन एवं माल ढुलाई के काम को भी जबरदस्त गति मिलेगी. जिसके चलते वैनगंगा-नलगंगा नदीजोड प्रकल्प एवं शक्तिपीठ महामार्ग को भविष्य के लिहाज से गेमचेंजर कहा जा सकता है.





