विदर्भ

3 सेमी गहरा जख्म रहना हत्या के प्रयास का मामला नहीं

हाईकोर्ट ने सुनाया बडा फैसला, उम्रकैद को 10 व 7 वर्ष की सजा में बदला

नागपुर /दि.7– यदि किसी व्यक्ति को जान से ही मार देना है, तो आरोपियों को थोडे बडे चाकू का प्रयोग किया जाएगा. जिसके वार से होने वाल जख्म 9 से 10 सेंटीमीटर गहमी हो सकती है. परंतु यदि किसी मामले में जख्म की गहराई केवल 3 सेंटीमीटर ही है. तो माना जा सकता है कि, आरोपी का उद्देश्य हत्या करना नहीं था. इस आशय का निरीक्षण दर्ज करते हुए मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने एक मामले के दोषी को दिलासा दिया. साथ ही आरोपी को सुनाई गई उम्रकैद की सजा को घटाते हुए अधिकतम 10 वर्ष की सजा में परिवर्तित कर दिया. यह फैसला न्या. मुकुलिका जवलकर व न्या. महेंद्र चांदवानी द्वारा सुनाया गया.
जानकारी के मुताबिक यवतमाल जिले के कनोबा गांव में 11 जून 2016 को खेत मोजनी को लेकर हुए विवाद के चलते अरविंद देशमुख व प्रणित देशमुख ने विलासराव देशमुख व प्रफुल्ल भैसे पर भाले से वार किया था. जिसमें बुरी तरह से घायल प्रफुल भैसे की इलाज के दौरान मौत हो गई थी तथा विलासराव देशमुख गंभीर रुप से घायल हुए थे. इस मामले में पुलिस ने भादंवि की धारा 302 व 307 के तहत अपराध दर्ज करते हुए अदालत में आरोप पत्र पेश किया था. पश्चात कनिष्ठ न्यायालय ने अरविंद देशमुख व प्रणित देशमुख को हत्या व प्राणघातक हमले के मामले में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. जिसके खिलाफ दोनों आरोपियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पर्याप्त सबूतों के अभाव में प्रणित देशमुख को निर्दोश बरी कर दिया है. वहीं अरविंद देशमुख को हत्या व प्राणघातक हमले के आरोप के तहत धारा 302 व 307 के अनुसार सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को रद्द कर उसे भादंवि की धारा 304 (1) के तहत 10 वर्ष तथा धारा 326 के तहत 7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई.
इस मामले में याचिकाकर्ता आरोपियों की ओर से एड. नलीन मजेठिया ने पैरवी की.

* डॉक्टर की गवाही रही महत्वपूर्ण
इस घटना में प्रफुल राउत की इलाज के दौरान मौत हुई थी. जिसके शरीर पर शुरुआत में केवल 3 जख्म थे. वहीं इसके बाद उसके शरीर पर और भी तीन जख्म होने की बात सामने आयी थी. यह जख्म इलाज के दौरान शरीर में नली डालते समय अथवा टाके लगाते समय होने का कबूला बयान पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों ने दिया था. साथ ही यह जख्म थोडे बडे रहने के चलते उन जख्मों में हुए संक्रमण की वजह से प्रणित की मौत होने की संभावना भी डॉक्टरों द्वारा व्यक्त की गई थी. डॉक्टरों के यही बयान और गवाही इस मुकदमें में बेहद महत्वपूर्ण रहे.

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