विदर्भ

वायु प्रदूषण से हृदय, फेफडे सहित मस्तिष्क पर भी होता है परिणाम

मौसमीय संशोधन में सामने आयी जानकारी

नागपुर प्रतिनिधि/दि.२२ – वायु प्रदूषण का परिणाम केवल फेफडो ओर हृदय पर ही नहीं होता बल्कि युवा पीढी के मस्तिष्क पर भी वायु प्रदूषण के अति सूक्ष्म घटक गंभीर परिणाम करते है. यह जानकारी नये संशोधन से सामने आयी है. मौसमीय संशोधन पत्रिका में यह संशोधन प्रकाशित हुआ है. वायु प्रदूषण के अति छोटे कण युवाओं के मस्तिष्क में अधिक प्रमाण में बढते है. बता दें कि, हाल की घडी में ९० फीसदी लोग यह बाहरी जहरीली हवा में सांस ले रहे है. अल्जायमर, पार्किंन्स जैसे मस्तिष्क से संबंधित बीमारियों और वायू प्रदूषण के अति सूक्ष्म घटकों का काफी नजदिकी संबंध है. अल्जायमर सोसायटी की ओर से वायु प्रदूषण की जो व्याख्या बनाई गई है. उसके अनुसार वायु, रासायनिक संयुग, धातु और छोटे कणों में प्रदूषित घटक रहते है. सांस लेते समय यह छोटे कण शरीर में प्रवेश करते है और रक्तधमनियों से वे मस्तिष्क में प्रवेश करते है. मस्तिष्क पेशियों में यह कण जमा होते है. ११ से २७ आयु समूह के अचनाक मृत्यु हुए युवाओं के मस्तिष्क के पेशियों में लोह और अल्यूमिनियम समृद्ध छोटे कण यह वायु प्रदूषण के घटकों के समान होने की जानकारी संशोधक बाबरा माहेर ने दी है. इन अति छोटे प्रदूषित कणों से मस्तिष्क को नुकसान पहुंचने की संभावना अधिक है. जिन शहरों में ज्यादा वायु प्रदूषण होता है वहां पर रहने वाले बच्चों में अल्जायमर का खतरा ज्यादा रहता है. मस्तिष्क पेशी में कण जिस पद्धति से प्रतिक्रियाएं पायी जाती है. उसके अनुसार मानसिक तनाव भी बढ सकता है और मस्तिष्क में वे मृत हो सकती है. जिन इलाकों में कम प्रदूषण है वहां पर यह दिखाई नहीं देता. इस संशोधकों में मै्िनसको शहर का बेहतरिन उदाहरण दिया है. बीते अनेक दशकों से शहरों में वायु प्रदूषण की चरम सीमाएं पार हो रही है. अधिकांश बडे शहरों में वायु प्रदूषण का प्रमाण प्रदूषण के सुरक्षित स्तर से अधिक है. प्रदूषण का उच्च स्तर अलग-अलग मानसिक स्वास्थ्य से जुडा हुआ है. अल्जायमर यह बीमारी शहरी युवाओं और लोगों में बडे पैमाने पर पायी जाती है. उनमें प्रदूषित कणयुक्त पदार्थों का भी संपर्क पाया गया है.

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