
* पुलिस-आर्थिक एजेंसियों की आंखों में धूल
नागपुर/दि.5-ऑनलाइन क्रिकेटसट्टेबाजी करनेवाले बुकी और जीएसटी के फर्जी बिलिंग का रैकेट चलानेवाले सफेदपोश अपराधी किराये पर लिए गए बैंक खातों के माध्यम से रोज करोडों का लेनदेन कर रहे हैं. पुलिस और आर्थिक एजेंसियों की आंख में धूल झोंककर संचालित इस रैकेट में इतवारी के ड्राई फ्रूट व्यापारी सहित कई सफेदपोश दिग्गज जुड़े हुए हैं. इस रैकेट की सच्चाई सामने आने पर शहर में भूचाल मच सकता है.
महादेव की तर्ज पर एक ऑनलाइन बैटिंग के एप्प चल रहे है. उनके खातों में रोज करोडों रुपए जमा होते हैं. इसी तरह फर्जी बिलिंग करके जीएसटी की चोरी करनेवाले रैकेट भी सक्रिय हैं. इस गोरखधंधे में कई व्यापारी लिप्त हैं. जीएसटी के नाम से सरकार को रोज करोड़ों रुपए का चूना लगाया जाता है. दोनों ही रैकेट किराये के खातों की मदद से चल रहे हैं. रैकेट के मुखिया ने बाजार में एजेंट नियुक्त किए हैं. एजेंट ही ‘सबकुछ’ संचालित करते हैं. एजेंट के पास सैकड़ों की संख्या में किराये के बैंक खाते होते हैं. यह खाते गरीब अथवा सामान्य व्यक्तियों के नाम पर होते हैं. बैंक खाता खोलने के बाद पासबुक, एटीएम और चेकबुक एजेंट रख लेता है. खाता धारक को हर माह 8 से 10 हजार किराया दिया जाता है. हर माह तय आय होने से खाताधारक इस गोरखधंधे को समझ नहीं पाता है. इन खातों का ब्यौरा एजेंट ऑनलाइन बैटिंग एप्प और जीएसटी रैकेट के मुखिया को सौंप देता है. जिसके बाद ग्राहक और रैकेट में शामिल लोग खातों में ऑनलाईन रुपए जमा करते हैं.
किराये के खातों में रोज करोड़ों रुपए जमा होते हैं. यह राशि एजेंट अलग-अलग खातों में डायवर्ट करके नगदी हासिल करके रैकेट को भुगतान करता है. इस जालसाजी के बदले में एजेंट को खातों में जमा राशि का 15 से 25 प्रतिशत कमीशन मिलता है. शहर में 15 से 20 बड़े रैकेट चल रहे हैं जो रोज एप्प पर ऑनलाइन सट्टेबाजी करनेवाले बुकी और जीएसटी रैकेट के लिए काम कर रहे हैं. इसी रैकेट से जुड़े इतवारी के एक ड्राई फ्रूट व्यापारी के पास गत दिनों पांच करोड़ की राशि ट्रांसफर हुई थी. बुकी और रैकेट के मुखिया ने इसका भुगतान मांगा था.