
कुर्हा/दि.15 – श्री संत सदाराम महाराज व्दारा 1594 में शुरु की गई व 427 वर्ष की परंपरा पूरी करने वाली विदर्भ की राजकन्या श्री रुक्मिणी माता की पालखी का प्रस्थान सोमवार 14 जून को श्री क्षेत्र कौंडण्यपुर से हुआ. शासन के निर्देशानुसार व मार्गदर्शन में यह पालखी पंढरपुर पहुंचेगी.
गत वर्ष की तरह इस वर्ष भी वैसी ही परिस्थति होने के कारण सोमवार को कुछ ही वारकरियों की उपस्थिति में पालखी का प्रस्थान किया गया. प्रथम माता रुक्मिणी देवी की पादूकाओं को संस्थान के अध्यक्ष नामदेव अमालकर व सचिव सदानंद साधु व्दारा सपत्नीक अभिषेक किया गया. पौराहित्य हभप महल्ले महाराज ने किया. पश्चात भजन व आरती पश्चात पादुकाओं को विधिवत पालखी में रख मंदिर की प्रदक्षिणा कर श्री संत सदाराम महाराज की समाधिस्थल पर पालखी रखी गई.
कार्यक्रम का समापन महाप्रसाद से किया गया. इस वर्ष भी सम्मान की पालखियों को अनुमति मिलने के कारण अब आगामी आदेश के बाद रुक्मिणी माता की पालखी पंढरपुर के लिये मार्गस्थ होगी. इस समय संस्थान के उपाध्यक्ष वसंत डाहे, विश्वस्त सुरेश चव्हाण, अशोक पवार, विजय डहाके, हिम्मत टाकोणे, अतुल ठाकरे, काले व वारकरी उपस्थित थे.