हर साल हाईकोर्ट में बढ रहे 42 हजार प्रलंबित मामले
6 वर्षों के दौरान प्रलंबित मामलों की संख्या पहुंची 7 लाख पर

नागपुर/दि.25– विगत 6 वर्षों के दौरान राज्य के उच्च न्यायालयों में प्रलंबित हरने वाले मामलों में औसतन 42 हजार 333 प्रलंबित मामले जुडते जा रहे है. मई 2018 में हाईकोर्ट मेें प्रलंबित रहने वाले मामलों की संख्या 4 लाख 64 हजार थी, जो मई 2024 में बढकर 7 लाख 18 हजार हो गई है. यानि इस दौरान 2 लाख 54 हजार प्रलंबित मामले बढ गये है. इस समय प्रलंबित रहने वाले मामलों में 6 लाख दीवानी व 1 लाख 18 हजार फौजदारी मामलों का समावेश है.
इस सदंर्भ में मिली जानकारी के मुताबिक हाईकोर्ट के मुंबई मुख्यालय में 2 लाख 72 हजार 600 दीवानी व 67 हजार 424 फौजदारी, औरंगाबाद खंडपीठ मेें 1 लाख 90 हजार 895 दीवानी व 25 हजार 544 फौजदारी, नागपुर खंडपीठ में 1 लाख 31 हजार 423 दीवानी व 24 हजार 610 फौजदारी तथा गोवा खंडपीठ में 5 हजार 114 दीवानी व 690 फौजदारी मामले प्रलंबित है. यह आंकडे नैशनल जुबिशियल डेटा ग्रीड पर घोषित किये गये है.
* महिलाओं के 65 हजार व बुजुर्गों के 96 हजार मामले
हाईकोर्ट में महिलाओं के 57 हजार 16 दीवानी व 8 हजार 391 फौजदारी ऐसे कुल 65 हजार 407 तथा बुजुर्ग नागरिकोें के 83 हजार 450 दीवानी व 12 हजार 650 फौजदारी ऐसे कुल 96 हजार 100 मामले प्रलंबित है.
* 1.84 लाख से अधिक मामले 10 साल से भी पुराने
हाईकोर्ट में प्रलंबित रहने वाले मामलों में 1 लाख 84 हजार 82 मामले 10 साल से भी अधिक पुराने है. जिसमें से 1 लाख 40 हजार 305 मामले 10 से 20 साल, 42 हजार 765 मामले 20 से 30 साल, 1 हजार 12 मामले 30 साल से भी अधिक पुराने है. इसके अलावा 1 लाख 75 हजार 621 मामले 5 से 10 साल पुराने है.
* दायर होने वाले मामलों की तुलना में फैसले कम
हाईकोर्ट में प्रतिमाह दायर होने वाले नये मामलों की तुलना में पुराने मामलों का निपटारा होने का प्रमाण कम है. जिसकी वजह से प्रलंबित मामलों की संख्या लगातार बढती जा रही है. पिछले महिने के दौरान हाईकोर्ट में 11 हजार 680 दीवानी व 4 हजार 518 फौजदारी ऐसे कुल 16 हजार 398 नये मामले दायर हुए. वहीं पिछले महिने 7 हजार 621 दीवानी व 4 हजार 103 फौजदारी ऐसे कुल 11 हजार 724 मामलों का निपटारा हुआ.
* मुंबई हाईकोर्ट में न्यायमूर्तियों के 28 पद रिक्त
– 22 कायम व 6 अतिरिक्त न्यायमूर्तियों की नियुक्ति जरुरी
जहां एक ओर उच्च न्यायालयों में प्रलंबित मामलों की संख्या बढकर 7 लाख के आसपास जा पहुंची है. वहीं दूसरी ओर उच्च न्यायालयों में न्यायमूर्तियों के 28 पद रिक्त पडे है. जिसके चलते प्रलंबित मामलों के निपटारे की रफ्तार सुस्त है. ऐसे में 22 स्थायी व 6 अतिरिक्त न्यायमूर्तियों की जल्द से जल्द नियुक्ति किये जाने की जरुरत है.
जानकारी के मुताबिक मुंबई उच्च न्यायालय मेें न्यायमूर्तियों के 94 (71 कायम व 23 अतिरिक्त) पद मंजूर है. जिसमें से इस समय केवल 66 (49 कायम व 17 अतिरिक्त) न्यायमूर्ती कार्यरत है. ऐसे में न्यायमूर्तियों के 28 पद रिक्त रहने का परिणाम हाईकोर्ट के कामकाज पर पड रहा है.
* देश में न्यायमूर्तियों के 336 पद रिक्त
– महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर
बता दें कि, देश में कुल 25 हाईकोर्ट है और इन सभी उच्च न्यायालयों में न्यायमूर्तियों के कुल 336 पद रिक्त है. जिनमें 164 कायम व 172 अतिरिक्त न्यायमूर्तियों के पदों का समावेश है. इलाहबाद हाईकोर्ट में न्यायमूर्तियों के सर्वाधिक 70 पद रिक्त है. जिसके बाद पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में न्यायमूर्तियों के 30 पद रिक्त है. वहीं इस मामले में 28 पद रिक्त रहने वाला मुंबई हाईकोर्ट देश में तीसरे स्थान पर है.
* किस हाईकोर्ट में कितने पद रिक्त
हाईकोर्ट रिक्त पद
कोलकाता 26
गुजरात 23
पटना 20
राजस्थान 18
दिल्ली 18
मध्य प्रदेश 15
तेलंगणा 14
कर्नाटक 12
ओडिशा 12
मद्रास 07
छत्तीसगढ 06
गुवाहाटी 06
झारखंड 06
हिमाचल प्रदेश 05
केरल 05
उत्तराखंड 04
जम्मू कश्मीर 01
मणिपुर 01
मेघालय 00
सिक्कीम 00
त्रिपुरा 00