विदर्भ

मंत्री यशोमति को हाईकोर्ट से मिली राहत

हाईकोर्ट ने सजा पर दिया स्थगनादेश

नागपुर प्रतिनिधि/दि.२२ – वन-वे मार्ग पर रोके जाने के बाद यातायात पुलिस के साथ मारपीट किये जाने के मामले में राज्य की महिला व बालविकास तथा अमरावती की जिला पालकमंत्री एड. यशोमति ठाकुर को अमरावती सत्र न्यायालय (Amravati Sessions Court) द्वारा सुनायी गयी सजा पर मुंबई उच्च न्यायालय (Mumbai High Court) की नागपुर खंडपीठ ने गुरूवार तक स्थगनादेश जारी किया. साथ ही राज्य सरकार को नोटीस जारी करते हुए 27 अक्तूबर तक अपना जवाब पेश करने का आदेश जारी किया.
बता दें कि, 24 मार्च 2012 को तत्कालीन विधायक एड. यशोमति ठाकुर अपरान्ह 4.15 बजे अपने वाहन में सवार होकर अपने कुछ कार्यकर्ताओं के साथ चूनाभट्टी मार्ग से होते हुए गांधी चौक की ओर जा रही थी. किंतु इस मार्ग पर एकतरफा यातायात यानी वन-वे रहने के चलते इस तरफ से जानी की मनाई थी. जिसके चलते वहां ड्यूटी पर तैनात यातायात पुलिस सिपाहीं उल्हास रौराले ने उनका वाहन रूकवाया. जिस पर एड. ठाकुर सहित वाहन चालक सागर एवं शरद जवंजाल व राजू इंगले ने वाहन से नीचे उतरकर उल्हास रौराले के साथ विवाद किया और उसकी कॉलर पकडकर उसके साथ मारपीट की. पश्चात इस मामले को लेकर राजापेठ थाने में शिकायत दर्ज करायी गयी. जिसके आधार पर पुलिस ने धारा 353, 332, 186 व 34 के तहत अपराध दर्ज करते हुए अदालत में आरोप पत्र पेश किया. जहां पर हुई सुनवाई पश्चात एड. यशोमति ठाकुर सहित अन्य तीन लोगों को तीन-तीन माह के सश्रम कारावास, 15 हजार रूपये के आर्थिक जुर्माने और जुर्माना न भरने पर एक माह के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनायी गयी थी. पश्चात इस फैसले के खिलाफ राज्य की कैबिनेट मंत्री एड. यशोमति ठाकुर द्वारा बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील करते हुए मांग की गई कि, निचली अदालत द्वारा सुनाये गये सजा के आदेश को रद्द किया जाये.
न्यायालय ने दोनों पक्षों का युक्तिवाद सुनने के बाद राज्य सरकार को हलफनामा पेश करने का आदेश दिया. इस मामले में राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सरकारी वकील जोशी ने नोटीस स्वीकार की. वहीं एड. यशोमति ठाकुर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुबोध धर्माधिकारी ने पैरवी की. जिन्हेें एड. कुलदीप महल्ले ने सहयोग किया.

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