विदर्भ

अब महापौर का भी सीधे जनता व्दारा चयन

‘कैग’ की सिफारिशों पर सरकार का सकारात्मक संकेत

ढाई वर्ष की बजाए पूरे पांच वर्ष रहेगा महापौर का कार्यकाल
नागपुर/ दि.30- राज्य में शिंदे-फडणवीस सरकार के सत्ता में आने पश्चात सरपंच व नगराध्यक्ष पद के चुनाव सीधे जनता व्दारा करवाये जा रहे है. इसी तर्ज पर अब महापौर का भी चुनाव करवाये जाने के सकारात्मक संकेत है. साथ ही अब महापौर पद की कालावधि ढाई वर्ष की बजाए पांच वर्ष किये जाने की संभावना है. भारत के नियंत्रक व महालेखापाल (कैग) ने राज्य सरकार इस आशय की सिफारिश की है. जिस पर उचित निर्णय लेने की बात मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदेे व्दारा कही गई है.
नागपुर शीतसत्र के दौरान विधान परिषद में विधायक प्रसाद लाड ने तारांकित प्रश्न के जरिये यह मुद्दा उपस्थित करते हुए पूछा कि क्या कैग ने महापौर का सीधे जनता के जरिये निर्वाचन करवाने तथा महापौर पद की कालावधि ढाई वर्ष की बजाय पांच वर्ष करने को लेकर कानून में संशोधन किये जाने की राज्य सरकार से कोई सिफारिश की है. इस सवाल पर जवाब देते हुए सीएम एकनाथ शिंदे ने लिखित तौर पर बताया कि, केंद्र सरकार ने महापौर व नगराध्यक्ष का कार्यकाल पांच वर्ष करने और महापौर पद के लिए सीधे जनता व्दारा चुनाव करवाये जाने की सिफारिश की है. कई राज्यों ने इसपर अमल करना भी शुरु कर दिया है. परंतु महाराष्ट्र में अब तक ऐसा नहीं हुआ. जिसके चलते कैग ने बताया है कि, इसी वजह से महाराष्ट्र में नागरी संस्थाएं बहुत अधिक सक्षम नहीं हैं और यहां पर विकास कामों गति नहीं मिल रही है. इन सभी सुझावों व सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार व्दारा आवश्यक निर्णय लेने हेतु कदम उठाए जा रहे है.
महापौर को अधिकार ही नहीं
मौजूदा स्थिति में महापौर के पास कोई कार्यकारी अधिकार नहीं है. बल्कि सारे अधिकार आयुक्त के पास होते है. वहीं महापौर की तुलना में नगराध्यक्ष के पास ज्यादा अधिकार होते है, क्या यह सही है, इस आशय का सवाल भी इस चर्चा के दौरान उपस्थित किया गया. जिसका जवाब देते हुए सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा कि, यह बात सही है.

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