
नागपुर/दि.20 – अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों के दाम आसमान छू रहे हैं, इसका असर सीधे तौर पर सोनपापडी और नमकीन उद्योग पर दिखाई दे रहा है. कई उद्योग बंद होने की कगार पर आ गए हैं. नागपुर से देश के लगभग सभी राज्यों में नमकीन और सोनपापडी की सप्लाई की जाती है. लघु उद्योग की श्रेणी में आने के कारण जिलेभर में नमकीन और सोनपापडी निर्माण के 500 से अधिक कारखाने है.
शहर में रोजाना 30 से 40 हजार किलो नमकीन और सोनपापडी का उत्पादन होता है. जो अब घटकर आठ से दस हजार किलो से भी कम रह गया है. महिलाएं भी अपने घरों से छोटा-मोटा व्यापार कर लेती हैं. नमकीन और सोनपापडी बनाने के लिए आम तौर पर पाम और वनस्पती तेल का उपयोग किया जाता है. पिछले कुछ दिनों से खाद्य-तेल के दाम काफी बढ गए है. तेल की आसमान छू रही कीमत के बीच यह उद्योग चलाना काफी मुश्किल हो रहा है. कुछ दिन पहले ेपाम तेल का डिब्बा 1150 रूपए बिक रहा था जो अब 2150 रूपए तक पहुंच चुका है.
लागत की वजह से दाम बढे
तेल के दाम लगभग दोगुना बढने के कारण नमकिन और सोनपापडी की लागत बढ गई है. इसका सीधा असर उत्पादों के दाम पर पडा है. थोक में 75 रूपए प्रति किलो बिकनेवाली सोनपापडी के भाव अब 80 से 85 रूपए हो गए है. वहीं पहले जो भाखरवडी, भुजिया, सेव 110 रूपए प्रति किलो बिकती थी वह अब 120 से 125 रूपए प्रति किलो के स्तर पर आ गए है.
मांग घटने से उत्पादन हुआ कम
नमकीन और सोनपापडी के दाम बढने के कारण उद्योजकों को इनका उत्पादन भी घटाना पडा हैं. कुछ उद्योजक क्वालिटी में समझौता कर रहे हैं, लेकिन कई लोग अपना नाम खराब नहीं करना चाहते इसीलिए दाम बढाए है. दाम बढने के कारण दूसरे राज्यों से आनेवाली मांग 70 से 80 प्रतिशत तक कम हुई है.
होली में बढ जाती है मांग
होली पर नमकिन की मांग काफी बढ जाती है. लेकिन इस साल तेल के दाम बढने के कारण उत्पादकों की होली फीकी पड गई है. शहर में लॉकडाउन के चलते वैसे ही नमकीन उत्पादोें की बिक्री काफी घट गई है.