
नागपुर/दि.5- स्वयं को सामाजिक कार्यकर्ता संबोधित कर कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग करने वाले भंडारा के जनहित याचिकाकर्ता पर मुंबई उच्च न्यायालय के नागपुर खंडपीठ ने दस हजार रुपए का दावा खर्च सुनाया व यह रकम दो सप्ताह में भंडारा जिला विधि सेवा प्राधिकरण के कार्यालय में जमा करने का आदेश दिया.
शुभम बावणकर यह जनहित याचिकाकर्ता का नाम है. उन्हें न्यायमूर्तिद्वय नितीन जामदार व अनिल पानसरे ने यह सजा सुनाई. बावणकर ने संबंधित रकम प्राधिकरण में जमा न किये जाने पर तहसीलदार द्वारा यह रकम कानूनन पद्धति से वसूल की जाये, ऐसा भी न्यायालय ने कहा. बावणकर ने भंडारा जिले के 54 व गोंदिया जिले के 18 रेती घाट नीलामी के खिलाफ जनहित याचिका दाखल की थी. वह याचिका इस फैसले द्वारा खारिज की गई.
रेती घाट की नीलामी करते समय शासन निर्णय का पालन नहीं किया गया, ऐसा दावा बावणकर ने किया था. लेकिन वे स्वयं रेती घाट ठेकेदार न होने के कारण और उन्होंने सिर्फ सामाजिक कार्यकर्ता इस नाते से जनहित याचिका दाखल किए जाने से न्यायालय ने 7 मार्च 2022 को उन्होंने प्रामाणिकता साबित करने कहा था. वहीं अब तक किए गए सामाजिक कार्यों की जानकारी मांगी थी.
दरमियान बावणकर ने भंडाला जिला विधिसेवा प्राधिकरण के माध्यम से दुर्गम भागों में समाज कार्य करने की बात कही थी. पश्चात प्राधिकरण ने बावणकर को कार्यालय में बुलाया था. लेकिन वे नहीं गए. न्यायालय ने इस बात को ध्यान में रखते हुए बावणकर प्रामाणिक व्यक्ति न होने की और उन्होंने कानूनन प्रक्रिया का दुरुपयोग किए जाने का निरीक्षण दर्ज कर यह निर्णय दिया.