आरोपी की उम्रकैद की सजा को अदालत ने किया 10 साल
अकोला जिले के डेढ साल की मासूम पर यौन शोषण का मामला

* हाईकोर्ट का फैसला
नागपुर /दि.1– डेढ साल की बच्ची के यौन शोषण के आरोपी को अकोला सत्र न्यायालय ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी. मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने भी आरोपी को दोषी ठहराया. लेकिन इस अपराध के लिए यह सजा अत्याधिक कडी है, ऐसा मत व्यक्त करते हुए हाईकोर्ट ने आरोपी को 10 साल कडी कारावास की सजा सुनाई है. न्यायमूर्ति नितिन सूर्यवंशी और न्यायमूर्ति प्रवीण पाटिल ने यह फैसला सुनाया.
अकोला जिले के मूर्तिजापुर थाना क्षेत्र में 8 फरवरी 2013 को आरोपी प्रशांत उर्फ गुड्डू इंगले के खिलाफ यौन शोषण का मामला दर्ज किया गया था. आरोप के मुताबिक बच्ची अपनी मां के साथ घर में थी. इस दौरान आरोपी गुड्डू इंगले घर में घुसा. जब बच्ची की मां ने उसे घर में घुसने का कारण पूछा, तो उसने कोई जवाब नहीं दिया. तब वह सहायता मांगने के लिए पडोस में रहने वाली भाभी के पास गई. जब वह लौटी, तो उसने आरोपी को अपनी डेढ साल की बच्ची के साथ अश्लील हरकते करते हुए देखा, उसने बेटी को बचाने की कोशिश की तो आरोपी ने हाथ पकडकर उसके साथ भी जबरदस्ती करने का प्रयास किया.
* उच्च न्यायालय में अपील
अकोला सत्र न्यायालय ने इस मामले में 1 अगस्त 2019 को आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई और 50 हजार रुपए जुर्माना लगाया. आरोपी ने इस सजा के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी. उच्च न्यायालय ने अपील को आंशिक रुप से स्वीकार करते हुए आरोपी की सजा को कम कर दिया.
* आरोपी ने कहा आरोप झूठे
आरोपी के पक्ष में उच्च न्यायालय ने दावा किया कि, पीडिता के यौन शोषण के कोई चिकित्सा प्रमाण नहीं है. आरोपी ने यह भी तर्क दिया कि, पीडिता के पिता ने उससे 30 हजार रुपए उधार लिये थे, जब वह अपनी रकम वापिस मांगने गया, तब उस पर झूठे आरोप लगाये गये. आरोपी ने अदालत में यह भी दलील दी कि, पीडिता के शरीर पर कोई चोट के निशान नहीं थे.
* सत्र न्यायालय का अवलोकन सही
उच्च न्यायालय ने आरोपी के दावे को खारिज करते हुए माना कि, सत्र न्यायालय का अवलोकन सही था. हालांकि इस अपराध के लिए उम्रकैद की दी गई सजा कठोर और अत्याधिक है. न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि, आरोपी को 10 साल की सजा देना न्यायसंगत होगा. इसलिए कोर्ट ने भी आरोपी के दोष को बरकरार रखते हुए उसे 10 साल की सजा सुनाई.