मेलघाट के आकाश में गिध्दों की पुन: उडान
विशाल पक्षियों के संवर्धन हेतु प्रयत्न फलीभूत

अमरावती/ दि. 12 – मेलघाट बाघ प्रकल्प के आकाश में दशकभर बाद गिध्द मुक्त उडान करते दिखाई दे रहे हैं. जैवविविधता बनाए रखने की कडी में महत्वपूर्ण विशाल पक्षी का पुनरागमन सतत किए जा रहे संवर्धन प्रयासों का सुफल बताया जा रहा है. निरीक्षण में देखा गया कि कुछ गिध्द राज्य की सीमा पार कर मध्यप्रदेश, गुजरात, कर्नाटक तक उडान ले रहे हैं. गिध्दों का यह जतन सीसीटीवी निगरानी में भी रखा गया है.
मेलघाट में कुछ समय पहले तक काफी प्रमाण में गिध्द पाए जाते थे. अचानक उनकी संख्या घटती चली गई. लुप्त प्राय: हो चले गिध्दों की यह स्थिति वन्यजीव प्रेमियों को परेशान कर गई. जंगल और जीवों से स्नेह करनेवाले लोगों ने देखा कि मेलघाट के जंगल से गिध्द नदारद हो गये हैं. जबकि बगल में ही मध्यप्रदेश के वनों में गिध्द दिखाई दे रहे थे.
संवर्धन का प्रारूप तैयार
मेलघाट में गिध्द लुप्त हो जाने से परिस्थिति का अध्ययन किया गया. इसके कारण खोजकर संवर्धन का प्रारूप रेडी किया गया. बुलढाणा जिले के सोमठाणा में गिध्द संवर्धन व प्रजनन केन्द्र स्थापित किया गया. 9 माह के कार्यकाल में अत्यंत संकटग्रस्त एक दर्जन गिध्दों का पुनर्वास वहां किया गया. पहले संरक्षित पिंजरे में रखा गया. धीरे- धीरे प्राकृतिक जीवन शैली की ओर इन गिध्दों को मोडा गया.
कौशल्य प्रशिक्षण दिया गया
वनाधिकारियों ने बताया कि गिध्दों को संवर्धन क्षेत्र में रखने के बाद उन्हें कौशल्य ट्रेनिंग भी दी गई. ताकि वे अपना खाद्य की खेाज, मांस फाडना, उंची उडान भरना और समूह में रहना सीख सके. इस प्रक्रिया की सीसीटीवी निगरानी की गई. 8-10 माह पश्चात देखा गया कि गिध्द आत्मनिर्भर हो गये है. उन्हें गत जनवरी में मुफ्त वितरण के लिए छोडा गया. अब मेलघाट के विविध भागों में गिध्दों का संचार हो रहा है.





