‘रेरा’ बंद किये जाने पर हमारा आक्षेप नहीं
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा

नई दिल्ली./दि.13 – ‘रिअल इस्टेट नियामक प्राधिकरण’ (रेरा) यह संस्था केवल बकायादार निर्माणकार्य व्यवसायियों को मदद करने के अलावा कुछ भी नहीं करती, जिसकी वजह से सभी राज्य को इस प्राधिकरण के संदर्भ में पुनर्विचार करने का समय आ गया है, ऐसा सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को स्पष्ट किया है. जिन लोगों के लिए रेरा की निर्मिति की गई थी, वे पूर्णत: निराश व हताश हुए है. यह संस्था बंद भी की जाती है, तो हमारा आक्षेप नहीं, ऐसा सर्वोच्च न्यायालय ने कहा.
सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश जॉयमल्ला बागची की खंडपीठ ने हिमाचल प्रदेश सरकार को रेरा का कार्यालय अपनी पसंद की जगह पर स्थालंतरण करने की अनुमति दी है. यह कार्यालय शिमला से धर्मशाला यहां लाने के निर्णय को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने स्थगनादेश दिया था. इस आदेश को राज्य सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय ने चुनौती दी थी. सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के स्थगनादेश के आदेश रद्द करने का निश्चित किया. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि, बकायादार बिल्डरों को सुविधा उपलब्ध करवाने के अलावा यह संस्था कुछ भी नहीं करती. इस संस्था बंद होती है, तो अच्छा है.





