भाजपा कार्यकारिणी का कब समाप्त होगा ग्रहण?

कुछ मुद्दों पर दिल्ली जता रही आपत्ति

* विधायकों को शामिल करने में भी बाधाएं
* विभागवार प्रभारी पदों की नियुक्ति का मुद्दा प्रदेश भाजपा के पाले में
मुंबई/दि.13 – रविंद्र चव्हाण के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनने के आठ महीने बाद भी प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा नहीं हुई है. विश्वसनीय सूत्रों ने बताया कि कुछ नामों पर राज्य के नेताओं के बीच सहमति न बन पाने और केंद्रीय भाजपा द्वारा कुछ मुद्दों पर आपत्ति जताए जाने के कारण कार्यकारिणी का गठन रुका हुआ है. रवींद्र चव्हाण पहले राज्य भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष थे, आठ महीने पहले वे पूर्णकालिक अध्यक्ष बने. हालांकि, पूर्व अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले की राज्य कार्यकारिणी अभी भी कार्यरत है. प्रदेश भाजपा द्वारा केंद्रीय भाजपा को भेजी गई कार्यकारिणी दो बार वापस आ चुकी है. केंद्रीय भाजपा ने इसमें कुछ दुरुस्तियां सुझायी थी. ढाई महीने बीत जाने के बाद भी कार्यकारिणी की घोषणा नहीं की गई है.
स्थानीय निकाय चुनावों को भी देरी का एक कारण बताया जा रहा है. दिल्ली सरकार का कहना है कि विधानसभा के विधायक कार्यकारिणी में जगह नहीं चाहते, इसलिए विधान परिषद के सदस्य काम करेंगे, क्योंकि उनका कोई विशिष्ट निर्वाचन क्षेत्र नहीं है, इसलिए वे पार्टी के काम के लिए समय दे सकते हैं.
* विभाग वार प्रभारी की आवश्यकता क्यों?
सूत्रों के अनुसार, राज्य के प्रत्येक विभाग के लिए एक प्रभारी नियुक्त करने का प्रस्ताव प्रदेश भाजपा ने केंद्रीय भाजपा को भेजा था. हालांकि, इसे मंजूरी नहीं मिली. इसका कारण यह बताया गया कि पार्टी के संविधान में इस प्रकार के प्रभारी की नियुक्ति का कोई प्रावधान नहीं है.
फिर भी, यदि किसी प्रभारी की नियुक्ति होनी है, तो दिल्ली से कहा जा रहा है कि प्रदेश भाजपा को इस संबंध में अपने स्तर पर निर्णय लेना चाहिए. इसी कारण प्रभारी का पद अधर में लटका रहा. जब विभागीय संगठन मंत्री मौजूद हैं, तो प्रभारी की आवश्यकता क्यों है, यह मुद्दा भी सामने आया है.
* वरिष्ठ विधायकों की समस्या
विदर्भ के एक वरिष्ठ विधायक, जिन्हें मंत्री पद नहीं दिया गया, महासचिव का पद चाहते हैं. वहीं दूसरी ओर, केंद्रीय भाजपा ने चेतावनी दी है कि विधानसभा विधायकों को महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए. इसी वजह से इन विधायकों को पद न मिल पाना एक बडी समस्या बन गई है.
केंद्रीय भाजपा का कहना है कि विधायकों और लोकसभा सदस्यों को अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में काम करना होता है और वे पार्टी संगठन के लिए अपेक्षित समय नहीं दे सकते.
* संगठन मंत्री पद पांच साल से रिक्त
प्रदेश भाजपा में महासचिव (संगठन) यानी संगठन मंत्री का पद पिछले चार-पांच वर्षों से रिक्त पडा है. इस पद के लिए नाम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा दिया जाता है और अब तक का अनुभव यही रहा है कि संघ के पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं को ही इस पद पर नियुक्त किया जाता है. हालांकि आंदोलन ने जल्द ही राज्य कार्यकारिणी की घोषणा शुरू कर दी है, फिर भी संगठन महासचिव का पद रिक्त रहने की संभावना है.

Back to top button