‘कब बाप मरेगा और कब बैल बटेंगे’

राकांपा के दुबारा एकजूट होने की संभावना पर सीएम फडणवीस ने कसा तंज

पुणे./दि.13 – आगामी महानगरपालिका चुनावों की पृष्ठभूमि में पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में राष्ट्रवादी कांग्रेस के दोनों गुटों (अजित पवार गुट और शरद पवार गुट) के संभावित एकीकरण को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं. इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपनी खास अंदाज में मिश्किल टिप्पणी करते हुए कहा कि, कब बाप मरेगा और कब बैल बटेंगे. पुणे में आयोजित एक प्रचार सभा के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए सीएम फडणवीस ने कहा कि अभी इन चर्चाओं को जरूरत से ज्यादा तवज्जो देने का कोई कारण नहीं है. उन्होंने कहा कि जब तक कोई ठोस फैसला सामने नहीं आता, तब तक ऐसे कयासों का कोई खास महत्व नहीं है.
सीएम फडणवीस ने भरोसा जताया कि पुणे शहर ने हमेशा भारतीय जनता पार्टी का साथ दिया है. इसी कारण हम अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत और समापन पुणे से करते हैं. केवल पुणे ही नहीं, बल्कि मुंबई, नाशिक और नागपुर जैसे बड़े शहरों के मतदाता भी भाजपा को समर्थन देने का मन बना चुके हैं. विरोधी चाहे जितने प्रयास करें, जनता की यह मानसिकता बदलने वाली नहीं है, ऐसा उन्होंने कहा. उन्होंने स्पष्ट किया कि पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में महायुति नहीं होगी. मैं पहले ही यह साफ कर चुका हूं. मैं शब्द का पक्का आदमी हूं. यह तय हुआ था कि मैत्रीपूर्ण मुकाबला होगा और व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप नहीं किए जाएंगे, लेकिन अजित पवार ने इस समझौते का पालन नहीं किया, कहते हुए उन्होंने नाराजगी भी जताई. हालांकि चुनाव के बाद स्थानीय स्तर पर जरूरत पड़ी तो सहयोग पर विचार हो सकता है, ऐसा संकेत भी उन्होंने दिया.
राष्ट्रवादी कांग्रेस के संभावित एकीकरण पर बोलते हुए फडणवीस ने कहा कि फिलहाल इस विषय पर बात करना जल्दबाजी होगी. उन्होंने कहा कि केवल दो महानगरपालिकाओं में दोनों गुट साथ आ रहे हैं, जबकि राज्य की बाकी 27 महानगरपालिकाओं में वे एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं, इसलिए इस ‘एकीकरण’ का खास राजनीतिक अर्थ नहीं निकलता. अजित पवार की दिल्ली यात्राओं को लेकर पूछे गए सवाल पर फडणवीस ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि, अगर वे हमारे वरिष्ठ नेताओं से मिलने दिल्ली जा रहे हैं तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है. बल्कि उनके लिए विमान और टिकट की व्यवस्था भी मैं खुशी-खुशी कर दूंगा. जब तक वे हमारे वरिष्ठों के संपर्क में हैं, तब तक मैं निश्चिंत हूं.

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