‘इर्विन’ के नामांतरण का प्रस्ताव कहां हुआ गायब?

तीन साल पहले अस्पताल को दिया गया था डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का नाम

अमरावती /दि.11- स्थानीय जिला सामान्य अस्पताल यानि इर्विन हॉस्पिटल का नाम भारतरत्न डॉ. बाबासाहब आंबेडकर अस्पताल रखा जाए, इससे संबंधित प्रस्ताव करीब तीन वर्ष पहले राज्य सरकार को भेजा गया था. साथ ही अस्पताल के मुख्य प्रवेशद्वार पर युवा स्वाभिमान पार्टी की ओर से नए नामकरण वाला फलक भी लगाया गया था. परंतु तीन वर्ष का समय बित जाने के बावजूद अधिकारिक तौर पर अस्पताल का नाम नहीं बदला गया. चूंकि अब आगामी 14 अप्रैल को डॉ. बाबासाहब आंबेडकर की 135 वीं जयंती मनाई जानी है, जिसके चलते इर्विन अस्पताल के नामकरण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा का विषय बना हुआ है.
बता दें कि, सन 1928 में जिला सामान्य अस्पताल की इमारत का निर्माण हुआ था और उस समय इस अस्पताल को तत्कालीन ब्रिटिश वॉईसराय लॉर्ड इर्विन का नाम दिया गया है. परंतु देश को आजाद हुए 78 वर्ष का समय बित जाने के बावजूद गुलामी का प्रतिक रहनेवाला ‘इर्विन’ नाम ही चलन में बना रहा. जिसके चलते उस नाम को बदलकर जिला सामान्य अस्पताल को भारतरत्न डॉ. बाबासाहब आंबेडकर का नाम दिए जाने की मांग कई वर्षों से उठ रही है. जिसके मद्देनजर राज्य सरकार को प्रस्ताव भी भेजा गया. साथ ही साथ युवा स्वाभिमान पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष व विधायक रवि राणा तथा भाजपा नेत्री व तत्कालीन सांसद नवनीत राणा ने अपने कार्यकर्ताओं के साथ 14 अप्रैल 2023 को अस्पताल के प्रवेशद्वार पर डॉ. बाबासाहब आंबेडकर के नाम का फलक लगाते हुए अस्पताल के नामांतरण की घोषणा कर जबरदस्त जल्लोष मनाया था. परंतु तीन वर्ष का समय बित जाने के बावजूद अधिकारिक तौर पर अस्पताल का नाम नहीं बदला गया.
जानकारी के मुताबिक जिला शल्य चिकित्सक कार्यालय द्वारा जिला सामान्य अस्पताल का नाम बदलने के संदर्भ में राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा गया था, परंतु उक्त प्रस्ताव कहां गायब हो गया है, अब यह अपने-आप में एक बडा सवाल है. साथ ही जिन्होंने नए नामकरण वाला फलक लगाया था, उन्हें भी इस बात की याद है अथवा नहीं, यह सवाल भी पूछा जा रहा है.

* करीब 6 महिने लगा था नए नाम वाला फलक
जिला सामान्य अस्पताल के प्रवेशद्वार पर युवा स्वाभिमान पार्टी द्वारा लगाया गया भारतरत्न डॉ. बाबासाहब आंबेडकर अस्पताल के नाम वाला फलक करीब 6 माह तक लगा हुआ था. परंतु पुराने प्रवेशद्वार को गिराकर नए प्रवेशद्वार का निर्माण करते समय उस फलक को हटा दिया गया था. जिसके बाद वह फलक दुबारा कभी लगा ही नहीं.

* डफरिन अस्पताल का भी नाम बदलने वाला था
जिला सामान्य अस्पताल के साथ ही डफरिन हॉस्पिटल के रुप में पहचाने जाते जिला स्त्री अस्पताल के नाम को भी बदलने का प्रस्ताव भेजा गया था. डफरिन अस्पताल की पुरानी इमारत को प्रथम स्त्री शिक्षिका सावित्रीबाई फुले तथा नई इमारत को राजमाता जिजाऊ का नाम देने से संबंधित प्रस्ताव भेजा गया था, परंतु अब इस प्रस्ताव को भी सभी लोग भूल गए है.

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