क्या धारणी या चिखलदरा में भी स्थापित होगी अलग जीएमजी!
एक मीटिंग तो हो चुकी है

* पालकमंत्री के निर्देश पर टटोली जा रही संभावना
* जीएमसी स्थापित हुई तो कुपोषण और माता मृत्यु पर लगाम
अमरावती/दि.2 – महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने दूर की सोची है. मेलघाट की कुपोषण और माता मृत्यु की समस्या पर स्थायी निदान के लिए जिले में एक और शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय जीएमसी की स्थापना की संभावना टटोली जा रही है. सरकारी सूत्रों पर यकीन करें तो पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के निर्देश पर गत सप्ताह खास बैठक हो चुकी है. जिसमें नए जीएमसी के लिए नियोजन पर विचार-विनिमय हुआ. जिले के विविध विभागों के अधिकारियों ने इस बैठक में वीडियो कॉन्फरंस के जरिए भाग लिया.
* अनेक विभागों के अफसरान मौजूद
गत 4 फरवरी को पालकमंत्री के निर्देश पर हुई बैठक में जिला शल्य चिकित्सक, लोक निर्माण विभाग, धारणी और चिखलदरा के तहसीलदार, भूमि अभिलेख के उपअधीक्षक आदि अधिकारी मौजूद थे. मेलघाट में ही मेडिकल कॉलेज शुरु करने के बारे में सकारात्मक चर्चा किए जाने की जानकारी दी गई.
* रुग्णों की भरमार, नागपुर रेफर
मेलघाट अब माता मृत्यु, कुपोषण के लिए कुख्यात है. ऐसे में यहा जनजातीय लोग अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं देते. वहीं घरेलू पारंपरिक इलाज करते है. जिससे समस्या बिकट हो जाती है. सीरियस होने पर रुग्ण स्वास्थ्य केंद्र लाए जाते है. वहां सुविधाएं न होने से डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी मरीजों को सीधे अमरावती-नागपुर रेफर कर देते है. ऐसे रुग्णों की संख्या काफी है. अमरावती का फासला 150-200 किमी होने से रुग्ण की जान बचाई नहीं जा सकती. बीच रास्ते वह दम तोड देते हैं.
* 23 मार्च को दिया था निवेदन
मेलघाट में स्वास्थ्य सेवा सुविधा के लिए बीजेपी के लीडर सुखदेव पवार ने गत 23 मार्च को पालकमंत्री और शासन को निवेदन दिया था. कहा जा रहा है कि, पवार के निवेदन की दखल चंद्रशेखर बावनकुले ने ली. उसी आधार पर प्रशासन को पत्र भेजकर मेलघाट में जीएमसी स्थापना संबंधी चर्चा के लिए निर्देश दिए थे. प्राथमिक नियोजन पर गत सप्ताह चर्चा होने का दावा खबर में किया जा रहा है.
* क्या लिखा था निवेदन में
निवेदन में बताया गया था कि, मेलघाट आदिवासी बहुल क्षेत्र होने के साथ दुर्गम है. सीधी सडक न होने से स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव तो है ही. आदिवासी समाज स्वास्थ्य में गिरावट आने पर शीघ्र अस्पताल भी नहीं जाते. ऐसे में यहां की बच्चों की कुपोषण और प्रसव दौरान माता मृत्यु का प्रमाण लाख कोशिशों के बावजूद कम नहीं हो रहा है. अन्य बीमारियां भी सिर उठा रही है. ऐसे में जीएमसी का कारगर उपाय सोचा गया है. जीएमसी रहने से यहां मरिजों का शीघ्र उपचार शुरु होकर यहां के सूरते हाल बदले जाने की संभावना देखी जा रही है. उनका कहना है कि, स्वास्थ्य केंद्र और मेडिकल ऑफीसर्स तथा कर्मचारी बढाए जाने के बावजूद कुपोषण व माता मृत्यु की समस्या पर अंकुश नहीं लगाया जा सका था. शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय यहां धारणी अथवा चिखलदरा तहसील में स्थापित किए जाने से मृत्यु प्रमाण में भारी गिरावट आने के साथ अन्य सुख-सुविधाएं बढेगी. जिससे मेलघाट संबंधित अनेकानेक समस्याओं का प्रभावी निराकरण होगा.





