चीनी उद्योग को पैकेज मिलेगा या फंड!
300 करोड का ट्रेझरी प्लान

* सरकार पर बढेगा 5 हजार करोड का भार
मुंबई/दि.20 – प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के आधारस्तंभ चीनी उद्योग को अभूतपूर्व आर्थिक संकट से घिरा देखा जा रहा है. ऐसे में सहकारी चीनी मिलों को सरकार से प्रति टन 500 रुपए का अनुदान मांगा गया है. मिल संचालकों की डिमांड मानने पर सरकार की तिजोरी में 5 हजार करोड का भार बढ जाएगा. दूसरी ओर यह भी संभावना है कि, सरकार पहले ही 315 करोड की डिमांड चीनी मिलों से कर चुकी है. वह पूर्ण होगी या सरकार को ही अनुदान की मांग पूरी करनी होगी. इस सब के बीच दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजीत दादा पवार को सभी स्मरण कर रहे हैं. अजीत दादा चीनी मिलों की समस्या के जानकार थे. उसी प्रकार सहकारिता और केंद्र व राज्य सरकारों के बीच समर्थ पुल रहे हैं.
* दीर्घकालीन बैंकिंग मॉडल
चीनी उद्योग को प्रतिवर्ष राज्य सरकार के पास हाथ पसारने की बजाय अपना स्थायी बैंकिंग फंड स्थापित करने का प्रस्ताव राज्य सहकारी बैंक ने रखा था. जिससे उद्योगों को अस्थायी आर्थिक रसद उपलब्ध करवाने दीर्घकालीन बैंकिंग मॉडल तैयार किया जाना चाहिए. इसका निर्णय राज्य सरकार परसों रविवार 22 मार्च को होने वाली बैठक में ले सकती है.
* जलवायु परिवर्तन का धक्का
गन्ने का उत्पादन इस बार जलवायु परिवर्तन के कारण करीब 15 प्रतिशत घटा है. उसमें केंद्र सरकार ने इथेनॉल को प्राथमिकता दे दी है. चीनी के रेट भी अस्थिर होने से चीनी मिलों का आर्थिक आधार डगमगा गया है. उत्पादन खर्च बढ जाने से प्रदेश के 45 शक्कर कारखानों ने किसानों की एफआरपी भी देने में असमर्थता व्यक्त की है. उधर चीनी आयुक्त ने 4315 करोड की नोटिसेस चीनी मिलों को भेजी है. चुनाव के दौरान चीनी मिलों ने 3200-3400 रुपए प्रति टन खरीदी की घोषणा की थी. किंतु अब चीनी मिलों को यह पैसा देने में दिक्कत आ रही है. पडोसी कर्नाटक सरकार ने 150 रुपए का अनुदान प्रति टन दिया है. जिससे राज्य सरकार पर भी अनुदान की मांग बढ रही है.
* क्या कहते हैं नेता और अधिकारी
कांग्रेस के गट नेता सतेज पाटिल ने कहा कि, चीनी मिलें राज्य को 8 हजार करोड का राजस्व देती है. डेढ लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाती है. ऐसे में उद्योग के दिक्कत वाले समय में राज्य सरकार ने मदद करनी चाहिए. प्रति टन 500 रुपए अनुदान दिये जाने की मांग बंटी उर्फ सतेज पाटिल ने उठाई और चीनी को भी उचित दाम दिलाने की बात कही.
* राज्य सरकारी बैंक के प्रशासक
राज्य सरकारी बैंक के प्रशासक विद्याधर अनास्कर ने कहा कि, चीनी उद्योग को बारंबार पैकेज चाहिए होता है. स्थायी उपाय खोजा जाना चाहिए. शक्कर महासंघ को अपने 300 करोड का फंड स्थापित करना चाहिए. जिसमें राज्य सहकारी बैंक 100 करोड का निवेश करने तैयार है. स्वनिधि के माध्यम से ब्राँड्स और पूंजी मार्केट का उपयोग करने पर निवेश की चिंता नहीं रहेगी. भविष्य में भी सरकार के सामने हाथ नहीं फैलाना नहीं पडेगा.





