महिला आयोग अध्यक्षा चाकणकर ने मांगी 30 दिन में पॉश ऑडिट रिपोर्ट

मुंबई /दि.2 – राज्य में कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य महिला आयोग ने महत्वपूर्ण पहल की है. आयोग की अध्यक्षा रुपाली चाकणकर ने राज्य के सभी जिलाधिकारी व संभागीय आयुक्तों को निर्देश दिये है कि, सरकारी और निजी कार्यालयों में गठित आंतरिक शिकायत समितियों (आईसीसी) का एक महीने के भीतर ऑडिट कराया जाये.
यह कदम कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीडन (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम 2013 यानि पॉश कानून के प्रभावी पालन को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है. इस कानून के तहत हर संस्थान में यौन उत्पीडीत की शिकायतों के निपटारे के लिए आंतरिक समिति बनाना अनिवार्य है. चाकणकर ने कहा कि, आयोग ने पहले राज्य सरकार से पॉश ऑडिट अनिवार्य करने का आग्रह किया था. सरकार ने 22 अगस्त 2025 को एक सरकारी आदेश जारी कर इस मांग का समर्थन किया था. इस ऑडिट से यह परखने में मदद मिलेगी कि, महाराष्ट्र में कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित और सरक्षित कार्य वातावरण मिल रहा है या नहीं.
* विस्तुत रिपोर्ट तैयार करें : आयोग ने अधिकारियों से कहा हैं कि, प्रत्येक कार्यालय की विस्तृत ऑडिट रिपोर्ट तैयार की जाये. इससे समिति के संरचना, प्राप्त और लंबित शिकायतें, की गई कार्रवाई, जागरुकता कार्यक्रम, वार्षिक रिपोर्ट डिस्प्ले बोर्ड की स्थिति का पूरा विवरण शामिल होना चाहिए. जहां समिति गठित नहीं है या अधुरी है, वहां तुरंत गठन सुनिश्चित करने को कहा गया है.
* शिकायतों में कई समस्याएं : अधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक, जिलास्तर पर स्थानीय शिकायत समिति का होना भी जरुरी है. आयोग ने कहा कि, निरीक्षणों और प्राप्त शिकायतों के आधार पर कई समस्याएं सामने आयी. इसमें कहा कि, कई कार्यालयों में आंतरिक समितियां है ही नहीं, कुछ समितियां केवल कागजों पर है. कानून के बारे में जागरुकता का अभाव है, सदस्यों को प्रशिक्षण नहीं मिला है.





