विवादित ‘नेफॉक’ को वर्क ऑर्डर

सुकली कंपोस्ट डिपो बायोमायनिंग

* मनपा में राजकीय दबाव या मेहरनजर
* शहर अभियंता पवार के हस्ताक्षर से कार्यारंभ आदेश जारी
अमरावती/दि.7 – महानगर पालिका के सुकली स्थित कंपोस्ट डिपो में कचरे का बायोमायनिंग प्रक्रिया ठेका आखिरकार कथित विवादास्पद कंपनी ‘नेफॉक’ को दिया गया है. शहर अभियंता रवींद्र पवार के हस्ताक्षर से कार्यारंभ आदेश दिए जाने की जानकारी है. कहा जा रहा है कि, निवर्तमान मनपा आयुक्त सौम्या शर्मा-चांडक ने मैटर्निटी लिव पर जाने से ठीक पहले यह फाइल आगे बढा दी.
* राजकीय दबाव की चर्चा
‘नेफॉक’ कंपनी के कामकाज की पद्धति और पात्रता पर आरंभ से ही सवाल उठाए जा रहे थे. कई सदस्यों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भोपाल की इस कंपनी को ठेका देने का विरोध किया था. प्रशासन ने विरोध को अनदेखा कर कार्यारंभ आदेश जारी कर दिया. फलस्वरुप मनपा गलियारे में चर्चा है कि, कंपनी को आखिर किसका राजकीय वरदहस्त है?
* क्या है यह ठेका?
भोपाल की नैशनल फेडरेशन ऑफ फॉर्मस प्रोक्योरमेंट प्रोसेसिंग एंड रिटेलिंग को-ऑप. ऑफ इंडिया लि. अर्थात ‘नेफॉक’ को सुकली में जमा लिगसी वेस्ट का निर्मूलन करने गत जनवरी माह में निविदा प्रक्रिया कर 12 करोड 46 लाख का ठेका दिया गया था. कहा जा रहा है कि, तत्कालीन आयुक्त सौम्या शर्मा ने अवकाश पर जाने से पहले प्रस्ताव पर तीव्र हलचल की. जिस दिन स्थायी समिति की सभा हुई, लगभग उसी समय वर्क ऑर्डर की प्रक्रिया पूर्ण की गई. इसे संयोग माने या सुनियोजित प्लान, यह प्रश्न अनेक के जेहन में आ रहा है.
* शहर अभियंता की भूमिका
अनेक तकनीकी अडचनों, शिकायतों के बावजूद शहर अभियंता रवींद्र पवार द्वारा वर्क ऑर्डर पर हस्ताक्षर किए जाने से उनकी भी आलोचना हो रही है. तथापि आगामी बारिश का सीजन सिर पर रहते कंपनी प्रत्यक्ष काम का प्रारंभ कब करती है और पारदर्शिता रहती है क्या, इस पर निगाहें होने का दावा किया जा रहा है.
* स्थायी समिति का विरोध
‘नेफॉक’ कंपनी को घनकचरा प्रबंधन का काम सौंपे जाने का स्थायी समिति ने पहले विरोध दर्शाया था. स्थायी समिति द्वारा कार्यारंभ आदेश देने से इंकार करने के कारण ही आयुक्त ने अपने अधिकार में यह आदेश जारी किए जाने की चर्चा है.
* 17 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
इस मामले में वसुंधरा फाउंडेशन के गणेश अनासाने ने याचिका दायर कर रखी है. जिस पर आगामी 17 अप्रैल को सुनवाई हो सकती है. विवादास्पद कंपनी को मनपा द्वारा बायोमायनिंग का काम दिए जाने से होनेवाले नुकसान का मुद्दा कोर्ट में उठाया जा सकता है. 10 वर्षों से बायोमायनिंग का काम बंद रहने के कारण केंद्रीय हरित प्राधिकरण में सुनवाई हुई थी. केंद्रीय प्राधिकरण ने महापालिका को 47 करोड का जुर्माना किया था, किंतु इतना जुर्माना महापालिका भुगतान नहीं कर सकती, इसलिए जुर्माने के आदेश को कोर्ट में चुनौती दी गई.

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