बंजारा व अन्य गैर आदिवासी समाज को न किया जाए एसटी संवर्ग में शामिल
आदिवासी युवा क्रांति दल ने जिलाधीश को सौंपा ज्ञापन

अमरावती/दि.15 – हाल ही में मराठा समाज द्वारा किए गए आंदोलन के चलते महाराष्ट्र सरकार ने मराठा समाज को ओबीसी प्रवर्ग से आरक्षण देने हेतु कालबाह्य व संविधान विरोधी हैदराबाद गैजेट को ग्राह्य मानने का निर्णय घोषित किया. जिसका आधार लेते हुए महाराष्ट्र राज्य में विमुक्त जाति यानि एनटी प्रवर्ग में शामिल रहनेवाले बंजारा समाज सहित अन्य गैर आदिवासी समाज के नेताओं द्वारा सरकार पर दबाव बनाते हुए उन समाजों को अनुसूचित जनजाति यानि एसटी संवर्ग में शामिल करने की मांग उठाई जा रही है. जो कि, पूरी तरह से नियमबाह्य व संविधान विरोधी है. अत: इस मांग को बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जाए, इस आशय की मांग का ज्ञापन आदिवासी युवा क्रांति दल द्वारा राज्यपाल के नाम जिलाधीश को सौंपे गए ज्ञापन में की गई.
इस ज्ञापन में कहा गया कि, भारतीय संविधान के अनुसार भले ही किसी राज्य में कोई समाज अनुसूचित जनजाति में शामिल है, परंतु वह दूसरे राज्य की भी अनुसूचित जाति की सूची में कायम रहेगी, ऐसा जरुरी नहीं है. बल्कि यह तत्कालिन सामाजिक परिस्थिति पर निर्भर करता है और संबंधित राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में शामिल है. उदाहरण के तौर पर कर्नाटक राज्य में मराठी मराठा को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल किया गया है. वहीं गुजरात में कुणबी जाति को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किया गया है. जबकि तेलंगना व आंध्र प्रदेश में माली जाति को अनुसूचित जनजाति में शामिल रखा गया है. परंतु यह तमाम जातियां महाराष्ट्र में अनुसूचित जनजाति के तहत शामिल नहीं है. ठीक इसी तर्ज पर महाराष्ट्र राज्य की अनुसूचित जनजाति की सूची में बंजारा समाज व अन्य गैर आदिवासी समाज को शामिल नहीं किया जा सकता.
ज्ञापन सौंपते समय आदिवासी युवा क्रांति दल के संस्थापक प्रमुख रामेश्वर युनाते सहित संजय मसराम, लक्ष्मण मसराम, देवानंद धुर्वे, जयवंत वाडिवे, संतोष किरनाके, पवन उईके, योगिता भोपले, प्रभा मसेर, संगीता मडावी, कृष्णा परतेकी व सतीश उईके आदि उपस्थित थे.





