166 पशु वैद्यकीय दवाखाने अब दो सत्रों में खुलेंगे

सुबह 8 से दोपहर 1.30 और दोपहर 3 से शाम 5 बजे तक रहेगी सेवा

अमरावती/दि.24 जिले के किसान- पशुपालकों की सुविधा का विचार कर पशु वैद्यकिय दवाखानों के समय में बदलाव करने का निर्णय राज्य सरकार ने लिया हैं. पशु वैद्यकिय दवाखानों का समय सुबह 9 से दोपहर 4.30 की बजार अब सुबह 8 से दोपहर 1.30 और दोपहर 3 से शाम 5 बजे तक दो सत्र में किया गया हैं.
साल के तीनों मौसम में किसान, पशु पालक, खेतिहर मजदूरों के दैनंदिन का विचार कर उन्हें सुबह का समय यह पशुधन के व्यवस्थापन के लिए सुविधा का और महत्वपूर्ण रहता हैं. इस समय में पशुधन को चार न खाना, पानी न पीना, दूध उत्पादन कम होना, धिमी गतिविधि, गोबर और मूत्र का बदलाव यह बिमारी के लक्षण को ध्यान में रखने के बाद तत्काल उपचार के लिए पशु वैधक उपलब्ध होना चाहिए. लेकिन राज्य के पशुवैद्यकिय दवाखानों का समय 1996 से 2021 तक सुबह 7 से दोपहर 12 और दोपहर 4 से शाम 6 बजे तक था. जबकि जनवरी 2021 से इसमें बदलाव कर सुबह 9 से दोपहर 4.30 बजे तक किया गया था. लेकिन किसान, पशुपालक और खेतिहर मजदूरों के काम के समय और पशुवैद्यकिय दवाखाने के समय का तालमेल न बैठने से पशुधन के प्रतिबंधात्मक व उपचारात्मक स्वास्थ्य सेवा में मर्यादा आ गई.

* इसलिए किया बदलाव
राज्य के पशुधन की उत्पादन क्षमता कम हो गई है. इसके पीछे पशुवैद्यकिय दवाखानों के समय का बदलाव यह कारण दिखाई दिया हैं. इस कारण दवाखाने के कामकाज के समय में बदलाव करने का निर्णय शासन ने लिया हैं.

* खेती के काम की परेशानी दूर
पशुजन्य उत्पादन में कमी आने से राज्य में कृषि व्यवसाय को जोड धंधे के रूप में पशुपालन का व्यवसाय बडी संख्या में किया जाता हैं. पशुपालन के जरिए मिलनेवाला उत्पन्न यह उनकी आय में बढोत्तरी करनेवाला महत्वपूर्ण घटक रहा तो ही कृषि काम व मजदूरी भी उनके लिए उतना ही महत्वपूर्ण हैं. पशु वैद्यकिय दवाखाने का समय सुबह 9 के बाद ही रहने से उनके पशुधन के उपचार के लिए उन्हें खेती के काम और मजदूरी छोडकर रूकना पडता था. जिससे उनका आर्थिक नुकसान होता था.

* स्थानिको को दे सूचना
कार्यालयीन समय के अलावा आकस्मिक अवसर पर पशु पालकों को 24 घंटे पशुवैद्यकिय सेवा उपलब्ध कर देने की जिम्मेदारी संस्था प्रमुखों की रहेगी. दोपहर के सत्र में दवाखाने के कार्यक्षेत्र के गांव में योजना विषयक प्रचार, प्रसिध्दि, प्रशिक्षण, मार्गदर्शन व तकनीकी कामकाज किया जाए. कार्यालय प्रमुख व कर्मचारियों द्बारा सप्ताह में एक बार कार्यक्षेत्र के गांव में कम से कम एक बार भेंट दी जाए.

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