रतन इंडिया उर्जा प्रकल्प ने सैंकडो ग्रेच्युटी से रखा वंचित
भाजपा नेता विवेक गुल्हाने के नेतृत्व में मजदूरों का अनशन आज से

* प्रशासन को ज्ञापन देने के बावजूद नहीं हुई सुनवाई
अमरावती/दि.5 – पंचतारांकित एमआईडीसी परिसर स्थित रतन इंडिया उर्जा प्रकल्प में कार्यरत सैंकडों मजदूरों को उनके कानूनी अधिकार की ग्रेच्युटी (उपदान) नहीं दिए जाने से मजदूरों में भारी आक्रोश व्याप्त हैं. बार-बार ज्ञापन सौंपने के बावजूद प्रशासन द्बारा कोई दखल न लिए जाने के कारण सोमवार 5 जनवरी से भाजपा के जिला उपाध्यक्ष विवेक गुल्हाने के नेतृत्व में रतन इंडिया के मजदूर अनशन पर बैठने जा रहे है. इस आंदोलन के माध्यम से मजदूर अब आर पार की लडाई छोडने के मूड में हैं.
कामगारों, प्रकल्पग्रस्तों और किसानों पर लगातार अन्याय करने वाले रतन इंडिया उर्जा प्रकल्प के खिलाफ अब मजदूर एकजुट हो गए है. इस में रतन इंडिया प्रबंधन के मैनेजमेंट के साथ साथ प्रशासन में भी खलबली मच गई है. रतन इंडिया उर्जा प्रकल्प की सहयोगी कंपनी दिल्ली मैनेजमेंट फैसिलिटी (डीएमएफ) में कार्यरत मजदूरों ने 13 नवंबर 2017 से 30 अप्रैल 2025 तक लगातार 7 वर्ष 6 माह की सेवा पूरी की हैं. ग्रेच्युटी अधिनियम के अनुसार उन्हें उपदान मिलना अनिवार्य हैं. इसके बावजूद डीएमएफ कंपनी का कामकाज 30 अप्रैल 2025 को समाप्त होने के बाद 7 से 8 महीने बीत जाने पर भी एक भी मजदूर को ग्रेच्युटी नहीं मिली है, ऐसा गंभीर आरोप मजदूरों की ओर से लगाया गया है. इतना ही नही बल्कि मार्च 2021 के वेतन से प्रत्येक मजदूर के 1200 से 1300 रुपये की कटौती की गई थी, वह राशि भी आज तक वापस नहीं की गई हैं. इसे मजदूरों के साथ सीधा अन्याय बताया गया है. मजदूरों का आरोप है कि ग्रेच्युटी के लिए बार-बार संपर्क करने के बावजूद कंपनी प्रबंधन के जानबूझकर अनदेखी की है. इस संबंध में मजदूरों ने भाजपा के जिला उपाध्यक्ष विवेक गुल्हाने को जानकारी दी, जिसके बाद उन्होंने रतन इंडिया उर्जा प्रबंधन, जिला प्रशासन और श्रम आयुक्त को लिखित ज्ञापन सौंपकर 4 जनवरी तक मजदूरों की समस्या का समाधान कर न्याय दिलाने की मांग की थी. साथ ही चेतावनी दी गई थी कि यदि मांगे पूरी नहीं हुई तो 5 जनवरी से रतन इंडिया कंपनी के मुख्य प्रवेश द्बार के सामने सभी मजदूरों के साथ बेमियादी उपोषण और धरना आंदोलन किया जाएगा.
हालांकि प्रशासन और रतन इंडिया प्रबंधक ने मजदूरोंं को ज्ञापनों को नजरअंदोज कर दिया. जिससे मजदूरों में असंतोष का महौल बन गया है. मजदूरों का आरोप है कि रतन इंडिया के सामनेे लाचार बनने श्रम आयुक्त भी मजदूरों के अधिकार, मेहनत और पीडा को भूल चुके है. अनेक ज्ञापन देने के बावजूद श्रम कार्यालय में मजदूरों की किसी भी समस्या का समाधान नहीं किया और मालिकों के पक्ष में खडा नजर आया. अब नाराज मजदूर न्याय मिलने तक अनशन पर बैठने का मन बना चुके हैं.





