मनपा के सभी पार्षदों का हुआ भव्य नागरी अभिनंदन व सत्कार
‘सप्तरंगी’ का विश्व मातृभाषा दिवस पर अपनी तरह का बेहद अनूठा उपक्रम

* साहित्य संस्था के आमंत्रण पर जनप्रतिनिधियों ने भी दलगत राजनीति से परे रहकर दर्ज कराई उपस्थिति
* सभी जनप्रतिनिधियों ने सर्वसमावेशक आयोजन की मुक्तकंठ से की प्रशंसा, कार्यक्रम को बताया मिसाल
* शहर में हिंदी साहित्य भवन बनाने की पार्षदों ने स्वयंस्फूर्त बात कही, सदन में प्रस्ताव लाने का आश्वासन
अमरावती /दि.27 – विगत चार दशकों से हिंदी साहित्य के प्रचार-प्रसार सहित प्रतिष्ठित एवं नवोदित हस्ताक्षरों को सशक्त साहित्यिक मंच प्रदान करने हेतु कार्यरत सप्तरंगी हिंदी साहित्य संस्था द्वारा अपनी तरह की एक अनूठी सोच को साकार करते हुए विगत रविवार 22 फरवरी को सुबह 10 बजे विश्व मातृभाषा दिवस बडे अनोखे ढंग से मनाया गया. जिसके तहत स्थानीय पुराना बाईपास के निकट चैतन्य कॉलोनी परिसर में मनकर्णा नगर में स्थित श्री मुंगसाजी माउली सभागृह में आयोजित कार्यक्रम में अमरावती महानगर पालिका के सभी 87 निर्वाचित पार्षदों एवं 8 स्वीकृत सदस्यों का नागरी सत्कार एवं अभिनंदन किया गया. खास बात यह रही कि, चुनावी एवं दलगत राजनीति से बेहद परे रहकर शहर के विकास को ध्यान में रखते हुए सर्वसमावेशकता के लिहाज से आयोजित इस कार्यक्रम में सप्तरंगी हिंदी साहित्य संस्था के आमंत्रण पर अलग-अलग राजनीतिक दलों से वास्ता रखनेवाले शहर के विभिन्न प्रभागों के लगभग सभी पार्षद उपस्थित हुए थे. जिन्होंने इस आयोजन को अपनी तरह की एक मिसाल बताते हुए कहा कि, अमरावती शहर में हिंदी साहित्य भवन बने, इस हेतु वे खुद अपने स्तर पर प्रयास करेंगे. जिसके लिए मनपा की आमसभा में प्रस्ताव भी लाया जाएगा. साथ ही साथ मनपा के पदाधिकारियों एवं पार्षदों ने अमरावती शहर में साहित्यिक गतिविधियों को एक बार फिर गतिमान करने हेतु मनपा के स्तर पर साहित्यिक आयोजनों की श्रृंखला को शुरु किए जाने की जरुरत भी प्रतिपादित की.
विगत रविवार 22 फरवरी को श्री मूंगसाजी माउली सभागार में आयोजित नागरी अभिनंदन समारोह की अध्यक्षता हिंदी साहित्यरत्न प्रा. डॉ. मनीषा जाधव द्वारा की गई तथा इस अवसर पर बतौर उद्घाटक महापौर श्रीचंद तेजवानी एवं प्रमुख अतिथि के रुप में उपमहापौर सचिन भेंडे के साथ ही विशेष अतिथियों के रुप में भाजपा के गटनेता चेतन गावंडे, वायएसपी के गटनेता ज्ञानेश्वर उर्फ नाना आमले, राकांपा के गटनेता अविनाश मार्डीकर, कांग्रेस के गटनेता विलास इंगोले, एमआईएम के गटनेता शेख हमीद शेख वाहेद, सेना-बसपा के गटनेता डॉ. राजेंद्र तायडे और मूंगसाजी माउली ट्रस्ट के संचालक मिलिंद मानकर की उपस्थिति रही. साथ ही इस समय सप्तरंगी संस्था अध्यक्ष नरेंद्र देवरणकर ‘निर्दोष’ एवं सचिव बरखा शर्मा ‘क्रांति’ भी गणमान्य अतिथियों के साथ मंच पर उपस्थित थे. साथ ही इस अवसर पर सत्कारमूर्तियों के रुप में अमरावती महानगर पालिका के सभी नवनिर्वाचित पार्षदों एवं उनके प्रतिनिधियों की आयोजन में सम्मानपूर्ण उपस्थिति रही.
विशेष उल्लेखनीय रहा कि, महापौर श्रीचंद तेजवानी एवं उपमहापौर सचिन भेंडे ने इस आयोजन में अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराई. क्योंकि वे किसी अति आवश्यक काम के चलते कहीं अन्य व्यस्त थे. ऐसे में दोनों गणमान्यों ने इस आयोजन में अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने के साथ ही प्रत्यक्ष उपस्थित नहीं हो पाने को लेकर खेद जताया. साथ ही अपने द्वारा दिए गए वीडियो संदेश में सप्तरंगी हिंदी साहित्य संस्था द्वारा किए जाते कामों की सराहना करते हुए संस्था के कामों हेतु हमेशा ही हरसंभव सहयोग करने का आश्वासन भी दिया.
इस आयोजन में सर्वप्रथम सभी अतिथियों का सप्तरंगी हिंदी साहित्य संस्था के पदाधिकारियों व सदस्यों द्वारा शाल, श्रीफल, पुष्पगुच्छ व सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया. जिसके उपरांत आयोजन की प्रस्तावना रखते हुए संस्था की सचिव बरखा शर्मा ‘क्रांति’ ने संस्था द्वारा विगत 40 वर्षों से किए जा रहे कामों पर प्रकाश डाला. साथ ही संस्था के वरिष्ठ साहित्यकार भगवान वैद्य ’प्रखर’ ने अपने उद्बोधन में बताया कि, संस्था के कई कवि टी व्ही चैनलों पर और अखिल भारतीय मंचों पर काव्य पाठ कर अमरावती का नाम रोशन किया है. इसके अलावा नागरी अभिनंदन व सत्कार समारोह के संयोजक पवन जायसवाल ने कहा कि सप्तरंगी संस्था नहीं, अपितु यह एक परिवार है. जहां हम मिलकर साहित्य सृजन करते हैं तथा एक-एक कवि की प्रत्येक रचना को निखारने का काम करते हैं.
इस अवसर पर मनपा के नेता प्रतिपक्ष व पूर्व महापौर विलास इंगोले ने अपने सत्कार के प्रत्युत्तर में कहा कि, सप्तरंगी हिंदी साहित्य संस्था द्वारा सर्वदलीय पार्षदों का एक साथ एक ही मंच पर सत्कार करते हुए अपनी सर्वसमावेशक सोच का परिचय दिया गया है. जो अपने-आप में एक मिसाल है. साथ ही उन्होंने सप्तरंगी हिंदी साहित्य संस्था की नियमित बैठकों व कामकाज के लिए एक छोटे से हॉल व कार्यालय की व्यवस्था कराने का आश्वासन देते हुए कहा कि, अमरावती शहर में हिंदी साहित्य भवन बने, इस हेतु वे हरसंभव प्रयास करेंगे. साथ ही उनकी पूरी कोशिश रहेगी कि, अमरावती में हिन्दी साहित्य सम्मेलन और अखिल भारतीय कवि सम्मेलन निरन्तर होते रहें. वहीं इस समय राकांपा के गुट नेता अविनाश मार्डीकर ने कहा कि साहित्य से ही समाज में जागरूकता पैदा होती है. सप्तरंगी हिंदी साहित्य संस्था वर्षों से समाज को जोड़ने का काम कर रही है. ऐसे में इस संस्था के साथ खड़े रहना यह हमारा काम है. इसके साथ ही पार्षद शेख हमीद ने कहा कि हिन्दू मुस्लिम बाद में, सबसे पहले हमारे लिए हिन्दुस्तान है. हिन्दुस्तान की आन के लिए हम सभी को एकजुट रहना चाहिए, महानगर पालिका की उन्नति के लिए हम सभी मिलकर काम करेंगे. सप्तरंगी आवाज दे, हम सभी सप्तरंगी के साथ खड़े हैं. इसी तरह पार्षद मो रेहान ने भी सबका साथ सबका विकास की बात कही. साथ ही सप्तरंगी को हमेशा साथ देने की बात कही.
इस अवसर पर युवा स्वाभिमान पार्टी के गट नेता ज्ञानेश्वर उर्फ नाना आमले ने कहा कि हम सब मिलकर अमरावती का विकास करेंगे. जितना बाकी चीजें जीवन में जरूरी हैं, उतना ही साहित्य जरूरी है. वहीं भाजपा पार्षद सुरेखा लुंगारे ने मातृभाषा के महत्व को प्रतिपादित करते हुए कहा कि, आज के इस प्रतिस्पर्धा वाले दौर में हर कोई अपने बच्चों को आधुनिक शिक्षा दिलाना चाहता है. इसकी वजह से मातृभाषा की कहीं न कहीं अनदेखी हो रही है. जबकि हर बच्चे के बौद्धिक विकास में मातृभाषा की ही सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रहती है. अत: आधुनिक शिक्षा को भी मातृभाषा के साथ जोडा जाना चाहिए. वहीं इस समय सप्तरंगी हिंदी साहित्य संस्था के अध्यक्ष नरेंद्र देवरणकर ने कहा कि अमरावती में एक से बढ़कर एक नामवर साहित्यिक बने और साहित्य जगत में अमरावती का नाम सबसे ऊंचा हो, इस बात को ध्यान में रखते हुए ही सप्तरंगी हिंदी साहित्य संस्था द्वारा विगत चार दशकों से काम किया जा रहा है और संस्था ने साहित्य जगत को एक से बढकर एक प्रतिष्ठित नाम दिए है. साथ ही नवोदित हस्ताक्षरों को निखारकर प्रतिष्ठित हस्ताक्षर बनाने का काम किया है.
कार्यक्रम के अंत में अपने अध्यक्षीय संबोधन के जरिए साहित्यरत्न प्रा. डॉ. मनीषा जाधव ने इस अनूठे आयोजन की शानदार संकल्पना के लिए सप्तरंगी हिंदी साहित्य संस्था के अध्यक्ष नरेंद्र देवरणकर सहित संस्था पदाधिकारियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि, मातृभाषा को लेकर ऐसे आयोजन हमेशा ही होते रहने चाहिए. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि, प्रत्येक बच्चे के लिए मां ही सबसे पहली शिक्षक होती है. जिसके जरिए बच्चा अपनी मातृभाषा के साथ परिचित होता है और दुनियां का हर व्यक्ति चाहे मुंह से किसी भी भाषा में बातचीत करें, लेकिन सोचते समय अपने भीतर विचारमंथन करने के लिए वह अपनी मातृभाषा का ही प्रयोग करता है. यही वजह है कि, जिन देशों में मातृभाषा को विशेष महत्व दिया जाता है, उन देशों में तरक्की रफ्तार भी काफी अधिक है.
इस कार्यक्रम में शानदार संचालन संतोष हांडे और गौरी देशमुख तथा आभार प्रदर्शन चन्द्रप्रकाश दुबे ’असीम’ ने किया. कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु कार्यक्रम के संयोजक पवन नयन जायसवाल, चंद्रभूषण किल्लेदार, सहसंयोजक राजेश व्यास तथा सप्तरंगी हिंदी साहित्य संस्था के उपाध्यक्ष श्याम दम्मानी ‘नीलेश’, नीलिमा भोजने ‘नीलम’, कोषाध्यक्ष मनोहर तिखिले, प्रचार प्रमुख प्रीतम जौनपुरी, कार्यकारिणी सदस्य मनोज मद्रासी, चंद्रप्रकाश दुबे ‘असीम’, दीपक सूर्यवंशी ‘दीपक’, संतोष हांडे, डॉ. गोवर्धन भस्मे एवं सलाहकार शंकर भूतडा व लक्ष्मीकांत खंडेलवाल सहित सभी सदस्यों ने महत्प्रयास किए.





