राज्यसभा सीट पर उद्धव गुट व कांग्रेस की दावेदारी से महाआघाडी में बढी खींचतान
महाआघाडी की बैठक में नहीं पहुंचे आदित्य ठाकरे

मुंबई /दि.28 – आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर महाविकास आघाडी की अहम बैठक शुक्रवार को हुई. बैठक के बाद कांग्रेस के नेता विजय वडेट्टीवार ने स्पष्ट किया कि, राष्ट्रीय राजनीति को ध्यान में रखते हुए राज्यसभा की सीट कांग्रेस को मिलनी चाहिए. कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है. इसलिए राष्ट्रीय समीकरणों को देखते हुए राज्यसभा की सीट कांग्रेस को देने का प्रस्ताव बैठक में रखा गया है. बैठक में राकांपा (शरद पवार) और शिवसेना (उद्धव ठाकरे) गुट के नेताओं ने अपनी-अपनी भूमिका रखी. दोनों दलों के नेताओं ने कहा कि, वे अपने-अपने वरिष्ठ नेतृत्व से चर्चा कर स्थिति स्पष्ट करेंगे. वहीं शिवसेना (उद्धव) ने भी इस सीट पर दावा ठोका है. हालांकि महाआघाडी की बैठक में उद्धव सेना के विधायक आदित्य ठाकरे नहीं पहुंचे.
* 5 मार्च तक नामांकन, सर्वसम्मति से होगा फैसला
कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने विश्वास जताया कि, राज्यसभा और विधान परिषद की सीटों का बंटवारा आपसी चर्चा से सुलझ जाएगा. उन्होंने कहा कि, 5 मार्च तक नामांकन की समय सीमा है, इसलिए मित्र दलों से सम्मानपूर्वक बातचीत कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा. उन्होंने दोहराया कि, महाविकास आघाडी एकजूट होकर चुनाव लडेगी और तीनों दलों की सहमति से ही उम्मीदवार तय किया जाएगा. हम साथ लडे, तो जीत निश्चित है. सूत्रों के अनुसार कांग्रेस एक मात्र सीट से अपने वरिष्ठ नेता बालासाहब थोरात को भेजना चाहती है.
* पवार के अस्पताल में भर्ती होने से बातचीत उलझी
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) गुट के प्रमुख शरद पवार के ‘नियमित’ स्वास्थ्य जांच के लिए अस्पताल में भर्ती होने से महाराष्ट्र में महाविकास आघाडी की जीत की संभावना वाली एक मात्र राज्यसभा सीट को लेकर विपक्षी गठबंधन के भीतर चल रही खींचतान तेज हो गई है. पवार खेमे ने पार्टी नेता के अस्पताल में भर्ती होने को नियमित जांच से संबंधित बताया है. लेकिन सहयोगी शिवसेना (उद्धव) और कांग्रेस ने अस्पताल में भर्ती होने के समय पर सवाल उठाये है. आगामी 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले पवार के अस्पताल में भर्ती होने से तीनों दलों के बीच इस सीट को लेकर बातचीत उलझ गई है. नामांकन की अंतिम तिथि 5 मार्च है. विपक्षी नेताओं का मानना है कि, मौजूदा संख्याबल के आधार पर आघाडी केवल एक सीट जीत सकती है और उससे अधिकतर प्रयास राजनीतिक जोखिम होगा. साल 2024 के विधानसभा चुनाव के बाद विपक्षी ताकत काफी घट गई है.