संतरा उत्पादक किसानों की होली का रंग बेरंग!
शासन की गलत नीति से संतरा उत्पादक किसान संकट में

* बजट सत्र में संतरा प्रक्रिया प्रकल्प के लिए सिर्फ घोषणाओं की बारिश
मोर्शी/दि.4 – होली यह रंगों का व उत्साह का त्यौहार हैं. इस पर्व पर रंग उडाने से मन की सभी मलीनता दूर हो जाती है. सप्तरंगो में डूब जाने का यह दिन हैं. लेकिन विदर्भ के कॅलिफोर्निया के नाम से पहचाने जानेवाले वरूड, मोर्शी तहसील के संतरा उत्पादक किसानों की होली बेरंग हुई हैं. इन दोनों ही तहसीलों में प्रमुख रूप से संतरा का उत्पादन लिया जाता है. लेकिन शासन की गलत नीतियों की वजह से यहां के संतरा उत्पादक किसान आर्थिक संकट में हैं.
मोर्शी, वरूड इन दोनों तहसीलों में 45 हजार हेक्टर जमीन में संतरा उत्पादन किया जाता हैं. कुल उत्पादन का 40 प्रतिशत संतरा आकार में छोटा होने की वजह से उसे योग्य दाम नहीं मिल रहा हैं. परिणाम स्वरूप किसानों को मिट्टीमोल भाव में संतरा बेचना पड रहा है या फिर फेकना पड रहा हैं. विदर्भ में एक भी संतरा प्रक्रिया उद्योग न होने की वजह से संतरा उत्पादकों को हर साल इस समस्या से गुजरना पडता हैं. आंबिया व मृग बहार को अत्याधिक कम दाम मिलने से संतरा उत्पादक किसान परेशान हैं.
विदर्भ में इतने वर्षों में आज तक एक भी सफल संतरा प्रक्रिया प्रकल्प साकार नहीं किया गया. सरकार द्बारा केवल तारीख पे तारीख दी गई. साल 1957, 1963, 1992, 1995, 2014, 2017, 2019, और अब 2026 के बजट सत्र में भी केवल संतरा प्रक्रिया प्रकल्प की केवल घोषणा ही की गई. इतना ही नहीं साल 2014 में यहां का घोषित संतरा प्रकल्प नांदेड ले जाया गया और यह प्रकल्प वहां व्यवस्थित शुरू है. पिछले कई वर्षों से कम बारिश, अकाल, गारपीट की वजह से किसानों की संतरा फसल पर रोग आने से पर्याप्त भाव नहीं मिल रहा. इन सभी परेशानी के चलते किसान आत्महत्या भी कर हरे हैं. होली जैसा रंगोंं का त्यौहार इन संतरा उत्पादक किसानों का बेरंग हुआ है.





