जिले में जलकिल्लत की संभावना

जनवरी से जून के दौरान 706 गांवों को फटका

* 718 उपाययोजना, 20 करोड का खर्च अपेक्षित
अमरावती/दि.4 – पिछले साल जोरदार बारिश होने के बावजूद भी इस वर्ष ग्रीष्मकाल में जिले में पानी की किल्लत निर्माण होने की संभावना हैं. जिला प्रशासन के आदेश के बाद ग्रामीण जलापूर्ति विभाग ने आखिर दूसरे चरण का मसौदा तैयार किया है. लेकिन जनवरी से जून के दौरान कम से कम 706 गांवों को पानी की समस्या से गुजरना पडेगा यह स्पष्ट हुआ है. पानी की किल्लत के निवारण के लिए 718 उपाययोजना प्रस्तावित की गई हैं. जिसमें 20 करोड रुपए के खर्च की अपेक्षा हैं. इस साल मेलघाट सहित 4 तहसील को छोडकर शेष 10 तहसील में पर्याप्त मात्रा में बारिश हुई हैं और 56 राजस्व मंडल में अतिवृष्ट दर्ज की गई हैं.
अक्तूबर माह तक सतत बारिश होने से भूजल पुनर्भरण को बढावा मिला और भूजल स्तर बढने से पानी की किल्लत नहीं होगी, ऐसा चित्र निर्माण हुआ था. किंतु जीएसडी की रिपोर्ट के अनुसार केवल एक-दो तहसील में भूजल स्तर में वृध्दि हुई है तथा उतना ही तहसील में जलस्तर घटा हैं. शेष 10 से 12 तहसील में भूजल स्तर स्थिर रहा. जिसकी वजह से अक्तूबर से दिसंबर के पहले चरण में पानी की किल्लत महसूस नहीं हुई. लेकिन जनवरी से मार्च इस दूसरे चरण में जल किल्लत की संभावना हैं.
जलकिल्लत के निराकरण के लिए जिला परिषद अंतर्गत प्रत्येक पंचायत समिति की ओर से कामों का प्रस्ताव मंगाया गया हैं. उसी के अनुसार सविस्तार मसौदा तैयार किया गया हैं. जिलाधिकारी को प्रशासकीय मंजूरी देने का अधिकार रहने से काम का मार्ग प्रशस्त होगा, ऐसी अपेक्षा हैं. लेेकिन विविध प्रक्रिया समय पर पूर्ण होने पर ही उपाययोजना प्रभावि रूप से चलाए जाना संभव होगा ऐसा प्रशासन की ओर से कहा गया हैं. 132 गांवों में कुओं का अधिग्रहण: मार्च के पश्चात जिले के 132 गांवों में 143 निजी कुओ का अधिग्रहण किया जाएगा, जिसमें कम से कम 25 लाख रुपए का खर्च अपेक्षित हैं. 51 गांवों में कुओं का खोलीकरण किया जाएगा. जलस्त्रोत को मजबूत करने के लिए 136 गांवों में 2.69 करोड रुपए का खर्च होगा.

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