जबरन धर्म परिवर्तन पर होगी सात साल की सजा
धर्मांतरण विरोधी कानून को राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी

मुंबई /दि.6 – राज्य में जबरन या लालच देकर कराए जा रहे धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए राज्य मंत्रिमंडल ने गुरुवार को ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026’ को मंजूरी दे दी है. इस कानून के तहत जबरन धर्म परिवर्तन कराने वाले व्यक्ति को सात वर्ष तक की कैद और पांच लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा. सरकार धर्मांतरण से जुडा विधेयक बजट सत्र के दौरान विधानमंडल में पेश करेगी. मंत्री नितेश राणे ने कहा कि, सरकार को जबरन धर्म परिवर्तन कराए जाने की कई शिकायतें प्राप्त हुई थी. इन शिकायतों के आधार पर उपाय सुझाने, अन्य राज्यों के कानूनों का अध्ययन करके कानून का मसौदा तैयार करने के लिए पुलिस महानिदेशक की अध्यक्षता में एक विशेष समिति बनाई गई थी. समिति ने 26 फरवरी 2026 को ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026’ का मसौदा सरकार को सौंपा था. कानून बनने के बाद धारा 14 के अनुसार जबरन या लालच देकर धर्म परिवर्तन कराने के मामले में दोषी पाए जानेवाली संस्था पर प्रतिबंध लगाने और जुर्माने का प्रावधान होगा. जबकि धारा 9 के तहत आपराधिक मामला दर्ज करने और सजा से जुडी व्यवस्था है. धारा 9 की उपधारा 4 के अनुसार दोषी व्यक्ति को सात वर्ष तक की कैद और पांच लाख रुपए का जुर्माना हो सकता है.





