यवतमाल के मनपुर के जंगल में लगी भीषण आग
आग बुझाने के दौरान एक वनपाल 60 प्रतिशत झुलसा, हालत गंभीर

यवतमाल /दि.7- गर्मी बढ़ने के साथ जंगलों में आग लगने की घटनाएं भी बढ़ने लगी हैं. ऐसी ही एक घटना में जंगल की आग बुझाने के दौरान एक वनपाल गंभीर रूप से झुलस गया. जानकारी के अनुसार वनपाल विजय सिंगनजुडे (47) आग बुझाने के प्रयास में लगभग 60 प्रतिशत तक झुलस गए और उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है.
जानकारी के मुताबिक यह घटना जिले के हिवरी वन परिक्षेत्र के मनपुर क्षेत्र में शनिवार दोपहर करीब तीन बजे हुई, जब जंगल में अचानक भीषण आग भड़क उठी. घटना के समय वन परिक्षेत्र में ड्यूटी पर तैनात विजय सिंगनजुडे अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और आग बुझाने का प्रयास शुरू किया. बताया जाता है कि जंगल के अंदरूनी हिस्से में तीन-चार स्थानों पर आग लगी हुई थी, जिसके कारण टीम को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर आग पर काबू पाने की कोशिश की गई. इसी दौरान आग ने अचानक विकराल रूप धारण कर लिया और विजय सिंगनजुडे आग की लपटों में घिर गए. अपनी जान बचाने के लिए उन्होंने पास के एक पेड़ का सहारा लिया और उस पर चढ़ गए, लेकिन तेज लपटों और गर्मी के कारण वह बुरी तरह झुलस गए.
घायल वनपाल को तुरंत यवतमाल के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया. उनकी हालत गंभीर होने के कारण बाद में बेहतर इलाज के लिए उन्हें छत्रपति संभाजी नगर स्थित विशेष बर्न अस्पताल में रेफर किया गया, जहां उनका इलाज जारी है. घटना की सूचना मिलते ही मुख्य वनसंरक्षक डॉ. किशोर मानकर और उपवनसंरक्षक धनंजय वायभासे अस्पताल पहुंचे और घायल वनपाल के स्वास्थ्य की जानकारी ली.
इस घटना के बाद वन विभाग के कर्मचारियों में नाराजगी भी देखने को मिली है. कर्मचारियों का कहना है कि जंगल की आग बुझाने के दौरान फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए जाते. कुछ कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के समय संबंधित क्षेत्र के अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं थे. गर्मियों में बढ़ती जंगल की आग की घटनाओं को देखते हुए वनकर्मियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है.
वहीं इस बीच मुख्य वनसंरक्षक डॉ. किशोर मानकर ने बताया कि आग अचानक तेज हो जाने के कारण वनपाल को बचने का पर्याप्त समय नहीं मिला. उन्होंने कहा कि विभाग के पास आग बुझाने के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध हैं और इस घटना की जांच के आदेश दे दिए गए हैं. वन विभाग के अनुसार, जंगल में सूखी पत्तियों और कचरे को हटाकर फायर लाइन बनाकर आग की घटनाओं को रोकने का प्रयास किया जाता है. फिलहाल इस घटना की विस्तृत जांच की जा रही है.