चिखलदरा की कॉफी को राष्ट्रीय स्तर पर देंगे पहचान
पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले का वादा

अमरावती / दि.11 – चिखलदरा में काफी का उत्पादन और संवर्धन रोजगार निर्मिति करता है. यह उपक्रम पर्यटन को भी गति देता है. चिखलदरा की हेरीटेज कॉफी को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलवाने का वादा पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने किया. चिखलदरा से दिल्ली तक कॉफी का मार्केटिंग करने का संकल्प लिया.
उमेद विदर्भ महिला सम्मेलन में वे बोल रहे थे. चिखलदरा नंबर वन पर्यटन केन्द्र बनने क लिए चिखलदरा महोत्सव को व्यापक बनाया जायेगा. आदिवासी महिलाओं को रोजगार के लिए अनेक उपक्रम चलाए जायेंगे. पालकमंत्री ने महिलाओं के स्टॉल को भेंट दी. पानीपुरी व भेल चखकर प्रशंसा की. कॉफी का मार्केटिंग करने का आश्वासन दिया. कॉफी मेलघाट के विशेष पहचान बन रही है. इस कॉफी को प्रोत्साहित करने का ऐलान पालकमंत्री ने किया. कॉफी से निर्मित सौंदर्य प्रसाधन का बॉक्स मिनाक्षी व भारती भालेराव ने पालकमंत्री को भेंट कर आभार माना. मंत्री नितिन गडीकर ने भी कॉफी प्रकल्प निर्माण करने के लिए जिलाधीश आशीष येरेकर को पत्र लिखा था.
बॉक्स
चिखलदरा की कॉफी विदर्भ ही नहीं बल्कि संपूर्ण देश में प्रसिध्द है. अंग्रेजो की पहली पसंद कॉफी उन्होंने 1820 में पहली बार चिखलदरा में रोपित की थी. मुल्हेरन कॉटेज नामक अंग्रेज अफसर ने केरल से काफी के पौधे लॉकर रोपित किए थे. यह कॉफी अरोबीका श्रेणी में आती है. जिसका स्वाद व गुणवत्ता बेजोड है. यह काफी बैंगलोर व मुंबई भेजी जाती है.





