रतन इंडिया विद्युत प्रकल्प को एनजीटी का नोटिस
पर्यावरण संरक्षण और किसानों को लाभ का प्रश्न

* केंद्र व राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मंत्रालय से भी जवाब मांगा
* मामला बायोमास पेलेट्स व आरडीएफ का इस्तेमाल न करने का
अमरावती / दि.13 – नांदगांव पेठ एमआईडीसी परिसर के रतन इंडिया औष्णिक विद्युत प्रकल्प में पर्यावरणीय नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि, कोयला आधारित इस ताप विद्युत प्रकल्प में निर्धारित नियमों के अनुसार बायोमास पेलेट्स और नगर निकायों के कचरे से तैयार इंधन का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा. इस मामले को लेकर पर्यावरणविद गणेश अनासाने ने एनजीटी में याचिका दायर की थी. इस याचिका को स्वीकार करते हुए एनजीटी ने संबंधित विद्युत प्रकल्प के साथ केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से जवाब मांगा है.
आवेदन के अनुसार सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2016 तथा केंद्र सरकार की नीतियों के तहत कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों में कोयले के साथ बायोमास पेलेट्स और नगरपालिका कचरे से बने आरडीएफ का इस्तेमाल करना आवश्यक माना गया है. इस वैकल्पिक इंधनों के उपयोग से कोयले की खपत कम होती है और कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है. विशेषज्ञों के अनुसार बायोमास पेलेट्स और आरडीएफ का इस्तेमाल न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है. बल्कि इससे पूर्व फसल अवशेष जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को भी कम किया जा सकता है. साथ ही किसानों को कृषि अवशेषों के बदले अतिरिक्त आय का स्त्रोत भी उपलब्ध हो सकता है. फिलहाल इस मामले की अगली सुनवाई पर पर्यावरण विशेषज्ञों, प्रशासन और आम नागरिकों का ध्यान केंद्रीत है. यदि आरोप सही पाये गये, तो संबंधित प्रकल्प को पर्यावरणीय नियमों के पालन के लिए कडे निर्देश दिये जा सकते है.
* प्रबंधन बडी चुनौती
शहरी क्षेत्रों में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में उत्पन्न होने वाले कचरे का प्रबंधन स्थानीय निकायों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. ऐसे कचरे के गैर-पुनर्चक्रणीय हिस्से को आरडीएफ में परिवर्तित कर तापीय विद्युत संयंत्रों में उपयोग करने से लैंडफिल में जाने वाले कचरे की मात्रा कम हो सकती है और ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था अधिक प्रभावी बन सकती है.
* किसानों को आर्थिक लाभ
कृषि अवशेषों से बायोमास पेलेट्स के निर्माण से किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत प्राप्त हो सकता है. इससे फसल अवशेष जलाने की समस्या कम होगी और पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा. पर्यावरण संरक्षण, प्रभावी कचरा प्रबंधन और किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण के दृष्टिकोण से इस नीति का प्रभावी क्रियान्वयन अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है. इस मामले की आगामी सुनवाई पर पर्यावरण क्षेत्र के विशेषज्ञों, प्रशासन और आम नागरिकों की नजर बनी हुई है.





