दस साल तक के बच्चों में श्वसन संक्रमण के मामलों में 50 गुना वृद्धि
वर्ष 2024 में मामलों की तुलना में वर्ष 2025 में संक्रमितों की संख्या 102 हुई

मुंबई /दि.19 – मुंबई में बढते वायु प्रदूषण का असर अब बच्चों की सेहत पर गंभीर रुप से दिखाई देने लगा है. इसका अंदाजा राज्य सरकार द्वारा संचालित कामा एण्ड अलब्लेस अस्पताल में पिछले दो वर्ष में इलाज के लिए आये 10 वर्ष की आयु के बच्चों से लगाया जा सकता है. पिछले दो वर्षों के आंकडों के अनुसार 10 वर्ष तक के बच्चों में उपरी श्वसन तंत्र के संक्रमण के मामलों में लगभग 50 गुना की बढोत्तरी दर्ज की गई है.
अस्पताल के आउट पेशेंट विभाग (ओपीडी) और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र के रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2024 में केवल दो उपरी श्वसन संक्रमण तंत्र के मामले सामने आये थे. जबकि 2025 में यह संख्या बढकर 102 हो गई. अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. तुषार पालवे ने बताया कि, बच्चों में उपरी श्वसन तंत्र संक्रमण बच्चों मेें होने वाली एक सामान्य बीमारी है, जो नाक, गले और उपरी श्वसन मार्ग को प्रभावित करती है. इसमें कॉमन कोल्ड, साईनस संक्रमण, फैरिंजाइटिस और लैरींजाइटिस जैसी बीमारियां शामिल है. डॉ. पालवे का कहना है कि, प्रदूषण के अलावा स्वच्छता की कमी, मौसम में बदलाव, ज्यादा ठंडक और ज्यादा भीड संक्रमण के बढने के प्रमुख कारण है.
* निचले श्वसन तंत्र संक्रमण के मामलें भी तीन गुना बढे
इसके अलावा निचले श्वसन तंत्र संक्रमण के मामलों में भी बढोत्तरी दर्ज की गई है. वर्ष 2024 में 19 मामले थे, जो 2025 में बढकर 59 हो गये. डॉक्टरों के अनुसार गले के नीचे के श्वसन मार्ग यानि ब्रोकाइटीस और फेफडों को प्रभावित करता है. यह संक्रमण वायरस या बैक्टेरिया से फैलता है. और संक्रमित बूंदों या नजदीकी संपर्क से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है.
* निचला श्वसन संक्रमण काफी गंभीर
डॉक्टरों के मुताबिक उपरी श्वसन तंत्र संक्रमण के मुकाबले निचले श्वसन तंत्र में संक्रमण काफी गंभीर है और गंभीर मामलों में एंटी बायोटिक, ऑक्सीजन सपोर्ट या अस्पताल में भर्ती की आवश्यकता पड सकती है. डॉक्टरों ने अभिभावकों से अपील की है कि, बच्चों को प्रदूषण से बचाने स्वच्छता बनाये रखने और लक्षण नजर आने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी न करें.





