सुविधा की बजाए सरदर्द साबित हो रहा चांगापुर का रेलवे अंडरपास
अब 50 मीटर की दूरी तय करने आधा किमी का लंबा फेरा

* नियोजनशून्य व मनमाने तरीके से किया गया अंडरपास का निर्माण
* परिसरवासियों की तकलीफों व दिक्कतों की ‘सुविधापूर्ण’ अनदेखी
अमरावती/दि.24 – बडनेरा से चांदुर बाजार की ओर जानेवाली नरखेड रेलवे लाइन पर चांगापुर परिसर में नागरिकों एवं वाहन चालकों को रेलवे क्रॉसिंग की वजह से होनेवाली दिक्कतों से छुटकारा दिलाने हेतु गेट क्रमांक एलसी-8 पर रेलवे अंडरपास का निर्माण कराया गया है. परंतु यह रेलवे अंडरपास सुविधा की बजाए सिरदर्द साबित हो रहा है. क्योंकि इस रेलवे अंडरपास के नक्शे को मंजूरी देते समय एवं प्रत्यक्ष कामकाज शुरु करते समय इसकी वजह से परिसरवासियों एवं वाहन चालकों को होनेवाली समस्याओं व दिक्कतों की ‘सुविधापूर्ण’ अनदेखी की गई तथा नियोजनशून्यता व दूरदृष्टि के अभाव का पूरा परिचय देते हुए मनमाने ढंग से इस अंडरपास का निर्माण किया गया. जिसके चलते कहा जा सकता है कि, इस अंडरपास की वजह से क्षेत्र के नागरिकों को भले ही रेलवे क्रॉसिंग की एक समस्या व दिक्कत से छुटकारा मिल गया होगा, लेकिन अब उन्हें मनमाने ढंग से बनाए गए इस रेलवे अंडरपास नामक नई समस्या और इससे पैदा होनेवाली दिक्कतों का लंबे समय तक सामना करना पडेगा.
बता दें कि, अमरावती से परतवाडा की ओर जानेवाली सडक के बाई ओर श्री क्षेत्र चांगापुर स्थित है. जहां पर चांगापुर नरेश का विख्यात मंदिर है. जहां पर विराजे महाबलि हनुमान की प्रतिमा को बेहद जागृत माना जाता है. जिनके दर्शन हेतु प्रति शनिवार अमरावती से बडी संख्या में भाविक-श्रद्धालु चांगापुर पहुंचते है. साथ ही साथ विगत कुछ समय से चांगापुर परिसर में रिहायशी बस्तियों का भी जबरदस्त ढंग से विकास हुआ है और इस परिसर में कई लेआऊट साकार होने के साथ-साथ कॉलनियां भी बसने लगी है. इसी परिसर के बीच से होकर अमरावती नरखेड रेल लाइन की पटरियां भी गुजरती है. जिसके चलते चांगापुर फाटे से चांगापुर मंदिर की ओर जानेवाले मार्ग पर रेलवे क्रॉसिंग बनी हुई है. जिसे रेलवे की जबान में रेलवे गेट क्रमांक एलसी-8 के तौर पर पहचाना जाता है. चूंकि कुछ समय पहले रेलवे ने अपनी सभी पटरियों को क्रॉसिंग मुक्त बनाने का निर्णय लिया था. जिसके तहत सभी रेलवे क्रॉसिंग के उपर से रेलवे ओवरब्रिज या नीचे से रेलवे अंडरपास के निर्माण को मंजूरी दी गई है. जिसके चलते चांगापुर परिसर स्थित रेलवे क्रॉसिंग के नीचे से अंडरपास मार्ग के निर्माण का निर्णय लेते हुए काम शुरु किया गया था. लेकिन जैसे ही तय नक्शे के मुताबिक यह काम शुरु होकर आगे बढा, तो परिसर में रहनेवाले लोगों सहित चांगापुर मंदिर में दर्शन हेतु आनेवाले भाविक-श्रद्धालु भौंचक रह गए. क्योंकि सीधे रास्ते के नीचे सीधा-सीधा रेलवे अंडरपास बनाने की बजाए रेलवे द्वारा काफी घुमावदार अंडरपास बनाया गया है. जिसके चलते पहले जहां रेलवे क्रॉसिंग के एक ओर से दूसरी ओर जाने हेतु महज 50 मीटर की दूरी तय करनी पडती थी, वहीं अब उसी दूरी को तय करने के लिए करीब 500 मीटर यानि आधा किमी की दूरी वाला घुमावदार रेलवे अंडरपास तैयार किया गया है. जो इस परिसर में रहनेवाले नागरिकों सहित यहां पर आनेवाले वाहन चालकों के लिए काफी सिरदर्द साबित हो रहा है.
यदि रेलवे अंडरपास के लंबे फेरे वाली बात और समस्या को भी एक बार के लिए अनदेखा कर दिया जाए, तो दूसरी बडी समस्या इस रेलवे अंडरपास की चौडाई और उंचाई को भी कहा जा सकता है. क्योंकि इस रेलवे अंडरपास की चौडाई महज 6 मीटर है. साथ ही दोनों ओर के 100 मीटर वाले पल्लों के बीच बनाए गए 18 मीटर की लंबाई वाले अंडरपास की उंचाई भी इतनी कम है कि, उसमें से होकर राज्य परिवहन निगम की एसटी बस या कोई ट्रक नहीं गुजर सकते, यानि इस परिसर में आगे चलकर यात्री ढुलाई व माल ढुलाई के काम में काफी दिक्कते आ सकती है. साथ ही साथ यह रेलवे अंडरपास काफी अधिक संकरा रहने के चलते इसमें आए दिन ट्रैफिक जाम की समस्या पैदा होने के साथ-साथ यहां पर सडक हादसों की संभावनाएं भी बनी रहेंगी. जिसके चलते इस रेलवे अंडरपास को किसी भी लिहाज से सुविधापूर्ण तो नहीं कहा जा सकता. ऐसे में यह जरुर स्पष्ट है कि, तमाम तकनीकी दिक्कतो और परिसरवासी नागरिकों को होनेवाली समस्याओं की ‘सुविधापूर्ण’ अनदेखी की गई है और नियोजनशून्यता का परिचय देते हुए मनमाने ढंग से इस रेलवे अंडरपास का निर्माण किया गया है. जिसका खामियाजा अब इस परिसर में रहनेवाले आम नागरिकों को उठाना पड रहा है और अब इस रेलवे अंडरपास के निर्माण के खिलाफ जमकर आवाजे भी उठ रही है.
परिसरवासियों ने आज इस समस्या को समझने हेतु दैनिक ‘अमरावती मंडल’ को विशेष तौर पर चांगापुर परिसर स्थित रेलवे अंडरपास देखने हेतु बुलाया था. जिसके चलते ‘अमरावती मंडल’ के टीम ने इस रेलवे अंडरपास का प्रत्यक्ष मुआयना करते हुए पूरे परिसर का जायजा लिया और पहली ही नजर में यह बात समझ में आ गई कि, इस रेलवे अंडरपास का निर्माण बिलकुल ही गलत ढंग, मनमाने तरीके तथा नियोजनशून्यता के साथ किया गया है. चांगापुर फाटे से चांगापुर की ओर जानेवाली सडक पर रेलवे क्रॉसिंग के बाई ओर से शुरु होनेवाले रेलवे अंडरपास में प्रवेश का रास्ता बिलकुल अंधे मोड की तरह है. यही स्थिति अंडरपास के भीतर घुसने और बाहर निकलने वाले मोड पर भी है, यानि अंडरपास का हिस्सा रहनेवाले चारों मोड पर दूसरी ओर से आनेवाले वाहन बिलकुल भी दिखाई नहीं देते. साथ ही साथ अंडरपास के भीतर वाला हिस्सा इतना अधिक संकरा है कि, वहां पर दोनों ओर से आने-जानेवाले वाहनों के बीच कभी भी और किसी भी वक्त भिडंत होने की पूरी संभावना है. इसके अलावा अंडरपास के भितरी हिस्से में बारिश के मौसम दौरान पानी भरने की समस्या भी रहेगी. क्योंकि उस सबसे निचले हिस्से में भरनेवाले बारिश के पानी को बाहर निकालने के लिए वहां पर कोई भी निकासी की व्यवस्था नहीं है. इसके साथ ही इस रेलवे अंडरपास को आधे-अधूरे काम के साथ शुरु कर दिया गया है तथा अंडरपास के भीतर रात के समय लाइटिंग की कोई व्यवस्था भी नहीं है. जिसके चलते रात के वक्त इस अंडरपास में घूप अंधेरा छा जाता है. ऐसे समय यहां से होकर गुजरनेवाले पैदल राहगिरों व सायकल चालकों को घूप अंधेरे में काफी समस्या व दिक्कतों का सामना भी करना पडता है. इसके चलते क्षेत्र के नागरिकों में इस रेलवे अंडरपास को लेकर तीव्र असंतोष की लहर व्याप्त है.
* करीब 400 करोड रुपयों की लागत से हो रहा निर्माण
यहां यह भी विशेष उल्लेखनीय है कि, चांगापुर परिसरवासियों सहित इस क्षेत्र से होकर आना-जाना करनेवाले नागरिकों एवं वाहनधारकों की ‘सुविधा’ को ध्यान में रखते हुए चांगापुर रेलवे क्रॉसिंग पर करीब 400 करोड रुपए की लागत से रेलवे अंडरपास का निर्माण कराया जा रहा है. जिसके निर्माण का जिम्मा नागपुर की यूनिक एसोसिएटस् नामक ठेकेदार एजेंसी को दिया गया है. परंतु जिस तरीके से यह रेलवे अंडरपास बनाया गया है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि, इसमें सर्वसामान्यों की सुविधाओं का कम और इसके निर्माण से जुडे पक्षों की ‘अर्थपूर्ण’ सुविधाओं का ध्यान अधिक रखा गया है. जिसके तहत बिना वजह ही रेलवे अंडरपास की लंबाई को लंबा खींचते हुए निर्माण कार्य में लगनेवाली लागत को नाहक ही बनाया गया है. लेकिन इस जरिए जनता के गाढे पसीने की कमाई की बर्बादी हुई है और इसके बदले में आम नागरिकों के हिस्से में पहले की तुलना में कहीं अधिक समस्याएं, दिक्कते व मुसीबते आई है.

* किसी भी काम का नहीं रेलवे अंडरपास
चांगापुर परिसर में रेलवे अंडरपास के निकट ही एक रिहायशी बस्ती में रहनेवाली प्रीति साखे ने दैनिक ‘अमरावती मंडल’ के साथ बातचीत करते हुए बताया कि, उनके हिसाब से यह रेलवे अंडरपास किसी भी काम का नहीं है, बल्कि यह परिसरवासियों सहित यहां पर चांगापुर नरेश के दर्शन हेतु आनेवाले भाविक श्रद्धालुओं के लिए सिरदर्द ही साबित होनेवाला है. प्रीति साखे ने बताया कि, यह रेलवे अंडरपास काफी घुमावदार होने के साथ-साथ बेहद संकरा भी है. जिसके चलते यहां पर आए दिन कोई न कोई सडक हादसा घटित होने की भी संभावना बनी हुई है. ऐसे में ज्यादा बेहतर होता कि, मौजूदा सडक की खुदाई करते हुए रेलवे पटरी के नीचे से बेहद सीधा रेलवे अंडरपास बनाया गया होता.

* अंडरपास में सुविधा व सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं
चांगापुर परिसर में ही रहनेवाले राधेश्याम साखे ने दैनिक ‘अमरावती मंडल’ को बताया कि, इस रेलवे अंडरपास का निर्माण करते समय यहां से होकर गुजरनेवाले लोगों की सुविधा व सुरक्षा के साथ ही भविष्य की जरुरतों को लेकर कोई भी सावधानी व सतर्कता नहीं बरती गई. इस रेलवे अंडरपास में मोड इतने छोटे व संकरे है कि, वहां से एक समय पर दो दुपहिया वाहन भी सुरक्षित ढंग से नहीं निकल सकते. ऐसे में जब प्रत्येक शनिवार को इस परिसर में चांगापुर नरेश के दर्शन हेतु भाविक-श्रद्धालुओं की अच्छी-खासी भीड उमडती है और बडी संख्या में यहां पर वाहनों की आवाजाही होती है, तो रेलवे अंडरपास में काफी समय तक ट्रैफिक जाम वाली स्थिति बनी रहती है.

* छोटीसी दूरी को बना दिया लंबा
इसके साथ ही दैनिक ‘अमरावती मंडल’ के साथ बातचीत करते हुए चांगापुर परिसर निवासी मनोज गावले ने बताया कि, पहले रेलवे क्रॉसिंग के एक ओर से दूसरी ओर जाने हेतु महज 50 मीटर की दूरी तय करनी पडती थी. वहीं अब इस दूरी को नापने हेतु करीब 500 मीटर का लंबा फेरा लगाना पडता है. साथ ही इसके लिए बनाया गया रेलवे अंडरपास पूरी तरह से असुविधापूर्ण व असुरक्षित भी है. जिसकी ओर परिसरवासियों ने रेलवे प्रशासन का कई बार ध्यान भी दिलाया. लेकिन रेलवे अधिकारियों द्वारा सभी समस्याओं को अनदेखा व अनसुना किया जा रहा है.
* हमारे लिए तो सिरदर्द है रेलवे अंडरपास
चांगापुर परिसर में रहनेवाले सेवानिवृत्त कर्मचारी मुरलीधर गावले ने इस रेलवे अंडरपास को चांगापुर परिसरवासियों के लिए सिरदर्द बताते हुए कहा कि, अभी तो बेहद छोटा रास्ता रहनेवाले इस रेलवे अंडरपास ने केवल वाहनों की आवाजाही को लेकर समस्याएं व दिक्कते देखी जा रही है. वहीं आगे चलकर बारिश के मौसम दौरान इस रेलवे अंडरपास में जब पूरी तरह से पानी भर जाएगा, तब यहां से वाहनों की आवाजाही ही पूरी तरह से ठप हो जाएगी. उस समय यह रेलवे अंडरपास किसी काम का नहीं रहेगा. उस वक्त लोगों को रेलवे पटरी के एक ओर से दूसरी ओर आने-जाने हेतु अन्य कोई पर्यायी मार्ग भी उपलब्ध नहीं रहेगा. उस समस्या के बारे में फिलहाल रेलवे सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों द्वारा कुछ सोचा ही नहीं जा रहा.





