विदर्भ के पांच बाघों को सह्याद्री व्याघ्र प्रकल्प में भेजा जाएगा
राष्ट्रीय व्याघ्र प्रकल्प की अनुमति

* विदर्भ के व्याघ्र प्रकल्पों में बाघों की संख्या क्षमता से अधिक
अमरावती/दि.6– विदर्भ के व्याघ्र प्रकल्पों में बाघों की संख्या क्षमता से अधिक होने से अब वनविभाग में बडी गतिविधियां शुरु की है. इसके पूर्व प्रायोगिक तत्व पर भेजे गये तीन बाघ सैह्याद्री वातावरण में अच्छी तरह रहने के बाद अब फिर से विदर्भ के 5 बाघ सह्याद्री व्याघ्र प्रकल्प में भेजने की तैयारी शुरु हो गई है. इसके लिए राष्ट्रीय व्याघ्र प्राधिकरण की अनुमति भी मिली है.
सह्याद्री व्याघ्र प्र्रकल्प में बाघों का अस्तित्व नगग्न हो गया था. लेकिन निसर्ग की श्रृंखला कायम रखने के लिए वहां बाघ रहना आवश्यक है. विदर्भ में विशेष रुप से पेंच और ताडोबा में बाघों की संख्या तेजी से बढने के कारण प्रादेशिक वर्चस्व के लिए बाघों के बीच संघर्ष होता है. उसे टालने के लिए कुल 8 बाघों को चरणबद्ध तरीके से पश्चिम महाराष्ट्र के सह्याद्री जंगल में छोडा जाएगा. इसके पूर्व भेजे गये बाघ वहां अच्छी तरह रहने के कारण वनविभाग का आत्मविश्वास बढा है. सह्याद्री में 20 से 25 बाघों का संगोपन हो सकता है. ऐसा नियोजन किया गया है.
* सह्याद्री में पर्यटन की अपार संभावना
सह्याद्री व्याघ्र प्रकल्प में बाघों की संख्या बढने पर मुंबई, पुणे, ठाणे और कर्नाटक के पर्यटकों को बाघ देखने का आसान अवसर मिलेगा. बताया जाता है कि, आने वाले दिनों में पेंच और ताडोबा व्याघ्र प्रकल्प से पांच बाघों को सह्याद्री व्याघ्र प्रकल्प में स्थानांतरीत किया जाएगा. इसके लिए सह्याद्री व्याघ्र प्रकल्प के उपवन संरक्षक और सहायक वन संरक्षक का एक दल पिछले सप्ताह विदर्भ का दौरा कर चुका है.
* भटकने वाली बाघीन टारगेट
– स्थलांतरीत प्राणि नई जगह पर बस जाएंगे या नहीं यह एक बडा सवाल है. विशेषज्ञों का कहना है कि, यदि नई जगह पर भोजन व पानी के पर्याप्त स्त्रोत हो, तो यह प्राणी वहां जल्दी बस जाते है.
– सह्याद्री में वर्तमान में मुख्य ध्यान शाकाहारी प्राणियों की संख्या बढाने पर है. ताकि बाघों को शिकार के लिए भटकना न पडे.
– विशेष रुप से विदर्भ के बाघ व्याघ्र प्रकल्प से बाहर भटक रही बाघीनों को सह्याद्री में भेजने की योजना बनाई जा रही है. इसमें 4 से 6 वर्ष की आयु वर्ग की बाघीनों को प्राथमिकता दी जाने वाली है.
* वनविभाग की नीति क्या?
संख्या का संतुलन : विदर्भ के अतिरिक्त वन्यजीवों को स्थानांतरीत करके प्राकृतिक संतुलन बनाए रखना.
संघर्ष निवारण : मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए प्राणियों को अत्याधिक संघर्ष वाले क्षेत्रों से स्थानांतरीत करना.
वैज्ञानिक देखरेख : स्थलांतरीत किये गये प्रत्येक बाघ की निगरानी रेडिया कॉलर के माध्यम से की जाएगी.
* बढती संख्या को देखते हुए उनका पुनर्वसन ही पर्याय
विदर्भ में बाघों का संरक्षण वैश्विक स्तर पर प्रशंसनीय है. हालांकि बढती संख्या को नियंत्रित करने का सबसे अच्छा विकल्प उन्हें सह्याद्री जैसे सुरक्षित प्राकृतिक आवास में पुनर्वसित करना है. एनटीसीए ने 8 बाघों को अनुमति दी थी. जिनमें से 3 को सह्याद्री भेजा जा चुका है.
– एम. एस. रेड्डी,
प्रधान मुख्य वनसंरक्षक (वन्यजीव, महाराष्ट्र).





