जेल के भीतर से कैदी कर सकेंगे परिजनों के साथ वीडियो कॉल पर बातचीत

गृह विभाग का निर्णय, जेलो को मिलेंगे 426 वीडियो कॉन्फरंसिंग सेट

अमरावती/दि.13– जेल का नाम सुनाए देते ही आंखों के सामने उंची-उंची दीवारे, लोहे की मोटी-मोटी छडों वाले दरवाजे और वहां पर बंद रहनेवाले कैदियों के दृष्य घूमने लगते है. जो सालोसाल अपने परिवार से दूर जेल की कोठरियों में रहते है. परंतु अब आधुनिक तंत्रज्ञान की सहायता से जेलो में बंद रहनेवाले कैदियों व उनके परिजनों के बीच की दूरी कम होगी. क्योंकि राज्य के विभिन्न कारागारों में बंद रहनेवाले कैदी अपने परिजनों से संवाद साध सके तथा न्यायालयीन प्रक्रिया में भी सुलभता आए, इस हेतु राज्य सरकार के गृह विभाग ने करीब 426 वीडियो कॉन्फरंसिंग सेट खरीदने को प्रशासकीय मान्यता दी है.
राज्य सरकार के निर्णयानुसार राज्य की जेलो में वीडियो कॉन्फरंसिंग सुविधा की योजना अंतर्गत अद्यावत संगणक प्रणाली की खरीदी की जाएगी. जिसमें हाई स्पीड इंटरनेट सहित ऑल इन वन कम्प्युटर सिस्टीम, वेब कैमरा, मायक्रो फोन व यूपीएस जैसे साहित्यों का समावेश रहेगा. इस हेतु करोडों रुपयों की निधि को मंजूरी भी दी गई है. इस सुविधा का सबसे बडा व सकारात्मक परिणाम कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य पर होगा. कई बार कैदियों के मिलने हेतु उनके परिजन व रिश्तेदार दूर-दराज के क्षेत्रों से लंबी दूरी की यात्रा करते हुए आते है. परंतु समय के अभाव व अन्य तकनीकी कारणों के चलते उनकी जेल में बंद रहनेवाले अपने कैदी परिजन से भेंट नहीं हो पाती. परंतु अब वीडियो कॉन्फरंसिंग के जरिए कैदी जेल से ही अपने बुजुर्ग माता-पिता तथा पत्नी व बच्चों के साथ ऑनलाइन संवाद साध सकेंगे.

* प्रस्ताव पर जल्द होगा अमल
कारागार व सुधार सेवा विभाग के अपर पुलिस महासंचालक व महानिरीक्षक द्वारा 19 जनवरी को गृह विभाग के समक्ष इस संदर्भ में प्रस्ताव दिया गया था और महज तीन माह के भीतर इस प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगाते हुए गृह विभाग ने इसे प्रशासकीय मान्यता भी दी. जिसके चलते अब जल्द ही इस सुविधा को अमल में लाया जाएगा.

* इस हेतु लिया गया निर्णय
परिजनों के साथ नियमित संवाद के जरिए कैदियों में निराशा को कम करने में सहायता मिलेगी.
– पेशेवर अपराधियों को अपराध जगत से बाहर निकालकर एक बार फिर समाज के मुख्य प्रवाह में लाने हेतु पारिवारिक प्रेम प्रेरणा साबित होगा.
-पारिवारिक संवाद के साथ-साथ कैदियों को न्यायालय में प्रत्यक्ष हाजीर करने में होनेवाले खर्च और सुरक्षा को लेकर खतरे को टाला जा सकेगा.
– अब कारागार से ही वीडियो कॉन्फरंसिंग के जरिए न्यायालयीन सुनवाई हो सकेगी. जिसके चलते पैसे, समय व श्रम की काफी बचत होगी.
– कुल मिलाकर यह निर्णय कैदियों के मानवाधिकारों और उनके सामाजिक पुनर्वसन के लिहाज से एक महत्वपूर्ण चरण साबित होगा.
– आधुनिक तकनीक के जरिए इस डिजिटल भेंट के जरिए कैदियों के जीवन में आशा की नई किरण निर्माण होने की भी पूरी संभावना है.

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