’यह दिन आएगा सोचा नहीं था, वहिनी का साथ दें, दादा को…’
बारामती में प्रचार सभा में सुप्रिया सुले हुईं भावुक

बारामती/ दि.21- पिछले ढाई महीने हम सभी के लिए बहुत कठिन रहे. आज भी विश्वास नहीं होता कि दादा (अजित पवार) हमारे बीच नहीं हैं. लेकिन दादा के सपनों को पूरा करने की जिम्मेदारी अब हम सबकी है. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले ने बारामती में उक्त शब्दों में अपनी भावनाएं व्यक्त कीं.
बारामती लोकसभा उपचुनाव के प्रचार का आज समापन हो रहा है. परसो यहां मतदान होना हैं. सुप्रिया सुले उम्मीदवार और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार की प्रचार सभा के लिए बारामती पहुंची थीं. मंच पर बोलते हुए सुप्रिया सुले भावुक नजर आईं. दादा के निधन के बाद यह चुनाव होने के कारण पूरी सभा में भावनात्मक माहौल था.
काकी से मिलीं, लेकिन सभा के बारे में बता नहीं सकीं
इस दौरान सुप्रिया सुले ने कहा, मैं पुणे से आते समय काटेवाड़ी में आशा काकी से मिलने गई. काकी टीवी देख रही थीं. उन्हें क्या बताऊं कि मैं यहां प्रचार के लिए आई हूं? मैंने सिर्फ इतना कहा कि इंदापुर गई थी, वहां से लौटते समय आपसे मिलने आई. उन्हें बताने की हिम्मत ही नहीं हुई. दादा के जाने से परिवार और बारामती पर जो दुख आया है, उससे उबरना आसान नहीं है.
दिल दहला देने वाला दिन
अपनी बात आगे बढ़ाते हुए सुप्रिया सुले ने कहा, सुबह 5 बजे पार्थ का फोन आया. उसने कहा कि डैडी का विमान गिर गया है. मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा था. आज भी आंखें बंद करती हूं तो वह दृश्य सामने आता है. मुझे लगा कि दादा विमान में नहीं होंगे, और अगर होंगे भी तो वह सुरक्षित बाहर निकल आएंगे. लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. आज वह कर्ता-धर्ता हमारे बीच नहीं हैं, यह दुख जीवन भर दिल में रहेगा.
बारामती का रिकॉर्ड और वहिनी का साथ
बारामती और पवार परिवार के रिश्ते पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा, पिछले छह दशकों से बारामती के लोगों ने पवार साहेब का साथ दिया है. इस देश में सर्वाधिक बार चुने जाने का मान बारामती के लोगों के कारण साहेब को मिलने वाला है. यही परंपरा दादा ने आगे बढ़ाई. अब यह जिम्मेदारी वहिनी और पार्थ-जय पर आई है. महाविकास आघाड़ी का हर कार्यकर्ता वहिनी के पीछे मजबूती से खड़ा है.
एक नंबर का बटन दबाएं
मेरी इच्छा थी कि यह चुनाव निर्विरोध हो. लेकिन अब मतदान हो रहा है. ईवीएम पर एक नंबर पर सुनेत्रा वहिनी का नाम और चुनाव चिह्न है. उस एक नंबर के बटन पर मुहर लगाएं. वह बटन दबाकर दादा को सच्ची श्रद्धांजलि दें, यही मेरी आपसे विनंती है, सुप्रिया सुले ने कहा.





