निजी स्कूलों के लिए फीस रिफंड नीति लाने की तैयारी
शिक्षा आयुक्त न बनाई समिति

* प्रवेश रद्द होने पर मिल सकता है शुल्क वापस
पुणे /दि.1– राज्य में निजी स्कूलों में प्रवेश रद्द होने की स्थिति में अभिभावकों को फीस वापसी देने संबधी नीति लागू करने की दिशा में स्कूल शिक्षा विभाग ने कदम बढाया है. उच्च शिक्षा संस्थानों की तर्ज पर अब स्कूल स्तर पर भी फीस रिफंड नीति लागू किए जाने की संभावना है. इस संबंध में शिक्षा आयुक्त सतींद्रप्रताप सिंह ने प्राथमिक शिक्षा संचालक शरद गोसावी की अध्यक्षता में समिति गठित की है. वर्तमान में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एनआईसीटीई) के तहत उच्च शिक्षा संस्थानों में तय अवधि के भीतर प्रवेश रद्द करने पर कुछ राशि काटकर शेष शुल्क वापस किया जाता है. उसी प्रकार राज्य में केंद्रीकृत ऑनलाइन प्रक्रिया से होनेवाले कक्षा 11 वीं के प्रवेश भी फीस रिफंड का प्रावधान है. हालांकि निजी स्कूलों के लिए अब तक ऐसी कोई स्पष्ट नीति लागू नहीं है.
समिति में ये शामिल
समिति में सेवानिवृत्त शिक्षा संचालक दिनकर टेमकर, धाराशिव जिला परिषद के प्राथमिक शिक्षाधिकारी रवींद्र खंदारे, नाशिक जिला परिषद के माध्यमिक शिक्षाधिकारी प्रशांत दिग्रजकर, विभिन्न निजी स्कूलों के प्रतिनिधि, अभिभावक जयश्री देशपांडे और शिक्षा क्षेत्र से जुडे अन्य विशेषज्ञों को शामिल किया गया है.
* अभिभावकों की लगातार मिल रही शिकायतें
शिक्षा विभाग के अनुसार महाराष्ट्र शैक्षणिक संस्था (शुल्क विनियमन ) के तहत निजी गैर अनुमादित स्कूलों की फीस निर्धारित करने संबंधी नियम मौजूद है. लेकिन प्रवेश रद्द होने पर फीस वापसी कैसे की जाए. इसे लेकर कोई सरकारी नीति नहीं होने से अभिभावकों की ओर से लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थी. इसी कडी में शिक्षा आयुक्त ने स्कूल स्तर पर शुल्क वापसी नीति तैयार करने के लिए समिति गठित करने का निर्णय लिया. समिति अध्ययन करेगी कि प्रवेश रद्द होने के बाद विद्यार्थियों द्बारा जमा की गई फीस का कितना और किस प्रकार से रिफंड किया जा सकता है. समिति से एक माह में इसकी रिपोर्ट मांगी गई है..