विधान परिषद चुनाव, अजित पवार की राष्ट्रवादी में नाराज़गी
विधायक अमोल मिटकरी ने जताया दुख

अकोला/दि.1 – विधान परिषद चुनाव को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) में अब नाराज़गी का माहौल शुरू हो गया है. विधान परिषद के लिए पार्टी ने ज़ीशान सिद्दीकी को मौका दिया है. इस पर विधायक अमोल मिटकरी ने अपना दुख व्यक्त किया है. उन्होंने कहा कि पार्टी की तरफ से उन्हें न तो कोई पूछताछ हुई और न ही कोई दिलासा दिया गया. उन्होंने सवाल किया कि क्या अजित दादा के लिए लड़ना ही मेरी गलती थी?
विधान परिषद सदस्य पद से विधायक अमोल मिटकरी 12 मई को रिटायर हो रहे हैं. नए सदस्यों के चयन के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू है और राष्ट्रवादी पार्टी ने अब ज़ीशान सिद्दीकी पर भरोसा जताया है. अमोल मिटकरी को दोबारा मौका नहीं मिला. इसी कारण उन्होंने सार्वजनिक रूप से नाराज़गी जताई है. इस संबंध में उन्होंने अपने ‘द’ अकाउंट पर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं.
* लड़ाई का यही फल मिलेगा, यह मानसिकता थी
अमोल मिटकरी ने अपनी पोस्ट में कहा, “मेरी लड़ाई का यही फल मिलेगा, यह मानसिक तैयारी 29 जनवरी को ही कर ली थी. अजित दादा के लिए ‘एक मौका’ क्या, ऐसे ‘हज़ार मौके’ यह अमोल मिटकरी न्योछावर कर देगा. आपकी लड़ाई कल भी लड़ रहा था, आज भी लड़ रहा हूँ और कल भी लड़ता रहूँगा. इस लड़ाई में कोई साथ हो या न हो, न्याय मिलने तक यह लड़ाई नहीं रुकने दूंगा, वही आपकी सच्ची श्रद्धांजलि होगी. हादसे का सच सामने आने तक मैं शांत नहीं बैठूंगा. जरूरत पड़ी तो इससे भी बड़ी कीमत चुकाऊंगा. जान भी दे देंगे.” विधान परिषद के लिए उम्मीदवारी न मिलने पर उन्होंने दुख जताया है. देवगिरी बंगले पर उम्मीदवारी को लेकर चर्चा चल रही थी. 70 से 75 नाम थे. उनमें से एक नाम अंतिम करना बेहद कठिन था. मापदंड क्या थे? यह सवाल है, ऐसा अमोल मिटकरी ने कहा. विधान परिषद में अमोल मिटकरी की जगह ज़ीशान सिद्दीकी को मौका दिया जा रहा है, तो मैं कहाँ कम था? यह स्पष्ट होना चाहिए. अजित दादा के हादसे के मामले को विधान परिषद में उठाने का पूरा प्रयास किया गया था, लेकिन वह अंत तक नहीं चला. अगर इसी मुद्दे पर मुझे किनारे किया गया है, तो यह भी बताया जाना चाहिए था, ऐसी अपेक्षा मिटकरी ने व्यक्त की है.





