‘अमरावती मंडल’ की समाचार सीरिज का मुंबई तक असर
चिखलदरा से सिडको की बिदाई तय

* 10 वर्षों तक 8 कर्मचारियों ने बैठे ठाले लिया था करोडों का वेतन
* जिलाधीश का कल का चिखलदरा दौरा साधारण नहीं था
* सिडको और स्कायवॉक के प्रश्नों को कलेक्टर ने टाला
चिखलदरा /दि.7- मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के विदर्भ के हिल स्टेशन चिखलदरा का आकर्षण बढाने 2018 में घोषित स्कायवॉक परियोजना संचालित करनेवाली एजेंसी सिडको की घोर लापरवाही और अनियमितता पर ‘अमरावती मंडल’ द्वारा प्रकाशित समाचार सीरिज का प्रभाव मुंबई तक देखा गया है. उच्चाधिकारियों और सीएम तक पहुंचे इन समाचारों के कारण अब हिल स्टेशन से सिडको का बोरिया-बिस्तर गोल होने के संकेत मिले है. चर्चा है कि, बुधवार का जिलाधिकारी आशीष येरेकर का चिखलदरा दौरा भी इसी कडी में रहा. जिलाधीश ने अनेक प्रकल्पों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया था.
‘अमरावती मंडल’ को सूत्रों ने बताया कि, सिडको के संदर्भ में प्रकाशित समाचारों के कारण ही कलेक्टर का आनन-फानन में चिखलदरा दौरा रहा. अब यहां से सिडको से जिम्मेदारियां निकाली जा सकती है. बता दें कि, ‘अमरावती मंडल’ ने प्रारंभ से ही स्कायवॉक को लेकर सकारात्मक दृष्टि रखी गई थी. स्कायवॉक जल्द से जल्द पूर्ण होने की स्थिति में चिखलदरा की टुरिस्टों की संख्या और बिजनेस बढने की आशा सभी को रही. पिछली बार जब 6 माह तक पुलिस वायरलेस सेंटर की एनओसी नहीं होने से काम बंद हो गया था. उस समय ‘अमरावती मंडल’ के प्रतिनिधि मनोज शर्मा ने तत्कालीन जिलाधीश शैलेश नवाल के सामने सबूत रखकर काम शुरु करवाया था. उसके बाद भी सिडको की सच्चाई और अनियमितता पूरे साक्ष के साथ ‘अमरावती मंडल’ ने लगातार सीरिज चलाकर वरिष्ठ स्तर पर सिडको की लापरवाही, अनियमितता के कारण स्कायवॉक का काम लटकने की ओर ध्यान दिलाया. वरिष्ठ स्तर पर समझ आने के बाद प्रशासन जागा.
इसकी जांच और बदनामी से बचने के लिए इसे यहां से हटाकर दूसरी यंत्रणा कार्यान्वित करने बाबत मंत्रणा होने की जानकारी प्राप्त हो रही है. जिससे सवाल उठाएं जा रहे कि, 60 करोड का खर्च करके चिखलदरा के भविष्य के साथ 18 वर्षों तक खिलवाड करनेवाली सिडको और उनके अधिकारियों को सिर्फ तबादला कर काम नहीं चलनेवाला है. उनकी विस्तृत जांच और कार्रवाई नहीं होती है, तो मामला उच्च न्यायालय तक ले जाया जाएगा, इस प्रकार की तैयारी बताई जा रही है.





