सरकार के खिलाफ हिंदुत्ववादी संगठन आक्रामक
मंदिरों की भूमि दी जा रही माफिया को?

* राजस्व मंत्री बावनकुले ने कानून बनाने की दर्शायी तैयारी
नागपुर/दि.6 – देवस्थान इनाम जमीनों से जुड़े विवाद को स्थायी रूप से सुलझाने के लिए राज्य सरकार कानून बनाने की तैयारी में है. प्रस्तावित कानून राजस्व विभाग की वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाएगा और नागरिकों को सुझाव व आपत्तियां दर्ज करने का अवसर दिया जाएगा, ऐसा राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बताया था. इस कानून का महाराष्ट्र मंदिर महासंघ और सनातन संस्था ने तीव्र विरोध किया है और इसे लागू करने पर सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने की चेतावनी दी है.
1995 के सार्वजनिक देवस्थान कानून के अनुसार, देवस्थान का मालिक देवता होता है. किसी भी मंदिर की जमीन बेची या हस्तांतरित नहीं की जा सकती. मंदिर में काम करने वाले पुजारी की आजीविका चलती रहे, इसलिए राजाओं-महाराजाओं द्वारा देवस्थान और मंदिरों को जमीन दी जाती थी. इन जमीनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है. इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय का भी निर्णय है.
अब मंदिर की जमीन लेने के लिए कानून बनाकर उसे भूमाफियाओं को सौंपने की साजिश तो नहीं है, ऐसी शंका महाराष्ट्र मंदिर महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुनील घनवट ने व्यक्त की. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार 15 दिनों में अपनी भूमिका स्पष्ट करे, अन्यथा राज्यभर में आंदोलन किया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि यह हिंदुत्ववादी सरकार है, इसलिए उनसे सकारात्मक उम्मीद है.
किसी भी धर्म की धार्मिक स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए कानून मौजूद है, लेकिन इस प्रस्तावित कानून से उसी को खत्म किया जा रहा है, ऐसा आरोप एडवोकेट अनूप जैस्वाल ने लगाया. सनातन संस्था के राष्ट्रीय सचिव चेतन हंसराज ने भी प्रस्तावित कानून या उसके मसौदे को तुरंत वापस लेने की मांग की. उन्होंने सवाल उठाया कि पश्चिम महाराष्ट्र में मंदिरों की 28 एकड़ जमीन राज्य सरकार के कब्जे में है, उससे सरकार ने कितना राजस्व अर्जित किया? उन्होंने यह भी कहा कि वक्फ बोर्ड की जमीन की सरकार सुरक्षा करती है, जबकि मंदिरों की जमीन अपने कब्जे में लेने की कोशिश की जा रही है – यह भेदभाव क्यों?
पश्चिम महाराष्ट्र और कोकण क्षेत्र में देवस्थान इनाम जमीनों से जुड़े विवादों को स्थायी रूप से सुलझाने के लिए राज्य सरकार कानून बनाने की तैयारी में है. लगभग चार लाख हेक्टेयर जमीन इस श्रेणी में आती है और देवस्थान अधिकार तथा कुल अधिकार को स्पष्ट करने के लिए कानून आवश्यक है. यह प्रस्तावित कानून दो-तीन दिनों में राजस्व विभाग की वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाएगा और नागरिकों से सुझाव मांगे जाएंगे. इस पर अंतिम निर्णय जुलाई महीने के सत्र में लिया जाएगा, ऐसा राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा था.





