धर्म स्वातंत्र्य विधेयक के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका
कई प्रावधान असंवैधानिक रहने का आरोप, कल होगी सुनवाई

नागपुर/ दि.7- महाराष्ट्र धर्म स्वातंत्र्य मुंबर्ई विधेयक में कई प्रवाधान असंवैधानिक रहने का आरोप लगाते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में एक जनहित याचिका दायर की गई हैं. जिस पर कल शुक्रवार 8 मई को न्या. अनिल किलोर व न्या.राज वाकोडे की दो सदस्यीय खंडपीठ के सामने सुनवाई होगी. रूबेन फ्रान्सिस, अमित शिंदे, व अब्दुल पाशा ने एड. अश्विन इंगोले के मार्फत यह याचिका दायर की हैं. जिसमें कहा गया है कि राज्य सरकार ने यद्यपी धार्मिक स्वतंत्रता अधिकारों के संरक्षण तथा गैर कानूनी धर्मांतरण को प्रतिबंधित करने के उद्देश्य से यह विधेयक लाया हैं. परंतु इस विधेयक की धारा 2 (ए) (बी) (पी), 3, 4, 6, 7, 8 (2), 9, 10, 12, 13 व 15 के प्रावधान धार्मिक स्वातंत्र्य व समानता के अधिकारों का उल्लंघन करनेवाले इस विधेयक में जबरन, जालसाजी के जरिए व गैर कानूनी धर्मातरण की व्याख्या भी स्पष्ट नहीं हैं.
इस याचिका में राष्ट्रपति, राज्यपाल, राज्य के मुख्य सचिव, विधानसभा सचिव व पुलिस आयुक्त को प्रतिवादित बनाते हुए कहा गया है कि प्रस्तापित कानून के अनुसार धर्मांतरित व्यक्ति के रिश्तेदार के संपर्क साधने पर भी पुलिस अधिकारी द्बारा शिकायत दर्ज करना अनिवार्य व बंधनकारक हैं. केवल गैर कानूनी धर्मांतरण हेतु किया गया कोई भी विवाह अथवा दोनों में से किसी भी एक पक्ष द्बारा दाखिल किए गए याचिका पर विवाह को अदालत द्बारा रद्द कर दिया जाएगा. साथ ही ऐसे विवाह अथवा संबंध से पैदा होनेवाले बच्चों को उनकी मां विवाह से पहले जिस धर्म से थी उस धर्म का मना जाएगा. वहीं बच्चों का अपने दोनों अभिभावकों की संपत्ति पर हक रहेगा. इस कानून के उल्लंघन हेतु 10 वर्ष के कारावास व 7 लाख रुपए तक के दंड का प्रावधान हैं साथ ही इस कानून के तहत अपराध दखल पात्र एवं गैर जमानती रहेंगे. जिसके चलते इस कानून का बडे पैमाने पर दुरूपयोग भी हो सकता हैं.





