अमरावती में फर्जी जन्म प्रमाणपत्र घोटाले की आहट
40 हजार से अधिक संदिग्ध रिकॉर्ड जांच के दायरे में

* एसआईटी ने शुरू की पड़ताल
अमरावती/दि.10- महाराष्ट्र में सामने आए कथित फर्जी जन्म प्रमाणपत्र घोटाले की जांच अब अमरावती तक पहुंच गई है। सरकारी रिकॉर्ड और डिजिटल प्रणाली के कथित दुरुपयोग से जुड़े इस मामले ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है, जिसने राज्यभर में जारी किए गए हजारों संदिग्ध जन्म प्रमाणपत्रों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार अमरावती महानगरपालिका में भी 40 हजार से अधिक जन्म प्रमाणपत्र रिकॉर्ड संदेह के घेरे में बताए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार के सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (सीआरएस) पोर्टल पर पुराने जन्म रिकॉर्ड अपलोड करने की प्रक्रिया के दौरान कथित रूप से बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं. नियमों के मुताबिक पुराने जन्म प्रमाणपत्रों को मूल स्वरूप में डिजिटल पोर्टल पर दर्ज किया जाना चाहिए था, लेकिन आरोप है कि कई मामलों में नाम, वर्तनी और अन्य विवरणों में बदलाव कर नए प्रमाणपत्र जारी किए गए. जांच एजेंसियों को आशंका है कि कुछ मामलों में केवल सुधार नहीं, बल्कि नई पहचान तैयार करने का प्रयास भी किया गया हो सकता है.
*20 से 75 वर्ष आयु वर्ग के लोगों के नाम पर संशोधित प्रमाणपत्र
जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि जिन लोगों के रिकॉर्ड में संशोधन किया गया, उनकी आयु 20 से 75 वर्ष के बीच बताई जा रही है. सामान्यतः जन्म प्रमाणपत्र में सुधार बचपन अथवा किशोरावस्था के दौरान होता है, लेकिन दशकों पुराने रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर बदलाव होने से संदेह और गहरा गया है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति के नाम या पहचान से जुड़ा नया जन्म प्रमाणपत्र तैयार हो जाता है तो उसके आधार पर पासपोर्ट, पैन कार्ड, आधार, बैंक खाता या अन्य सरकारी दस्तावेज प्राप्त करना आसान हो सकता है. यही कारण है कि इस मामले को केवल प्रशासनिक गड़बड़ी नहीं, बल्कि संभावित पहचान धोखाधड़ी और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला माना जा रहा है.
*‘ओल्ड इवेंट’ सुविधा के दुरुपयोग की आशंका
जांच एजेंसियों के अनुसार सीआरएस पोर्टल की ओल्ड इवेंट सुविधा का उपयोग पुराने जन्म रिकॉर्ड को डिजिटल स्वरूप में दर्ज करने के लिए किया जाता है. आरोप है कि इसी सुविधा का उपयोग कर कुछ मामलों में मूल रिकॉर्ड में बदलाव किए गए और संशोधित जानकारी के आधार पर नए प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए.
जांच अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि संशोधन वैध प्रक्रिया के तहत हुए या फिर नियमों को दरकिनार कर रिकॉर्ड में फेरबदल किया गया. यदि अनियमितता साबित होती है तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और लाभार्थियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
*अमरावती के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
उपलब्ध जानकारी के अनुसार जांच की अवधि 1 जनवरी 2024 से 31 मई 2026 तक रखी गई है. इस दौरान अमरावती महानगरपालिका क्षेत्र में बड़ी संख्या में संशोधित जन्म प्रमाणपत्र जारी किए गए. वर्ष 2025 में लगभग 35,140 संदिग्ध जन्म प्रमाणपत्र जांच के दायरे में आए हैं. वर्ष 2026 के पहले पांच महीनों में 5,693 रिकॉर्ड संदिग्ध पाए गए हैं. इन आंकड़ों के सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर चिंता बढ़ गई है. हालांकि यह स्पष्ट किया जा रहा है कि सभी रिकॉर्ड फर्जी हैं, ऐसा अभी नहीं कहा जा सकता. जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि इनमें से कितने मामलों में नियमों का पालन किया गया और कितने मामलों में अनियमितता हुई.
*भाजपा ने उठाए सवाल, जांच की मांग
मामले को लेकर भाजपा पदाधिकारियों ने अमरावती महानगरपालिका आयुक्त वर्षा लड्डा को ज्ञापन सौंपकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. भाजपा नेताओं का आरोप है कि यदि जन्म प्रमाणपत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर फेरबदल हुआ है तो यह बेहद गंभीर विषय है और इसकी तह तक जाना आवश्यक है.
* एसआईटी की जांच पर टिकी निगाहें
राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी अब संबंधित रिकॉर्ड, दस्तावेजों, डिजिटल लॉग और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया की जांच कर रही है. जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कहीं यह संगठित नेटवर्क के माध्यम से चलाया गया मामला तो नहीं, जिसमें सरकारी कर्मचारियों और बाहरी लोगों की मिलीभगत रही हो.
फिलहाल प्रशासन ने नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है. अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी. यदि आरोप सही पाए गए तो यह महाराष्ट्र के सबसे बड़े दस्तावेजी घोटालों में से एक साबित हो सकता है, क्योंकि जन्म प्रमाणपत्र किसी भी नागरिक की मूल पहचान का आधार माना जाता है और उसमें की गई अनियमितता का प्रभाव कई अन्य सरकारी दस्तावेजों पर भी पड़ सकता है.





