एक ही कारखाना, दर्जनों ब्रांड

जिले में पानी का खेल किसके संरक्षण में?

* एक ही एफएसएसएसएआई नंबर, बाजार में अलग-अलग नामों की बोतले
* खाद्य एवं औषधी प्रशासन की कब खुलेगी नींद?
अंजनगाव सुर्जी/दि.17– पीने का पानी सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य से जुडा विषय है. लेकिन जिले में पानी के कारोबार में एक ऐसे खेल की चर्चा है, जिससे उपभोक्ताओं के साथ धोखाधडी होने की आशंका जताई जा रही है. बताया जा रहा है कि एक ही पानी उत्पादक कंपनी द्वारा जिले की विभिन्न तहसीलों में अलग-अलग होटलों, लॉन्स, विवाह समारोह स्थलों, राजनीतिक कार्यक्रमों और निजी आयोजनों के लिए अलग-अलग नामों से पानी की बोतलें तैयार कर आपर्ति की जा रही है.
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बोतलों पर ब्रांड का नाम अलग-अलग दिखाई देता है, लेकिन कई स्थानों पर एफएसएसएसएआई पंजिकरण नंबर एक ही पाया जा रहा है. इससे यह सवाल उठ रहा है कि यह केवल एक ही विपणन (मार्केटिंग) रणनिति है या फिर उपभोक्ताओं को भ्रमित करने का प्रयास जिले की कई तहसीलों के एमआयडीसी क्षेत्रों तथा कुछ स्थानों पर घरेलु स्तर से भी यह व्यवसाय संचालित होने की चर्चा है. एक ही कारखाने में तैयार किया गया पानी अलग-अलग नामों के लेबल लगाकर बाजार में भेजा जा रहा है. इस कारण उपभोक्ताओं को ऐसा प्रतित होता है कि वे विभिन्न कंपनियों का पानी उपयोग कर रहे है, जबकि वास्तविकता में पानी एक ही स्त्रोत से आ रहा हो सकता है.
आश्चर्यजनक बात यह है कि खाद्य एवं औषधी प्रशासन विभाग ने अब तक इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कोई ठोस कार्रवाई की हो, ऐसा दिखाई नहीं देता. जिले भर में यह व्यवसाय खुलेआम चलने के बावजूद कोई बडी कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे है. इस बीच, खाद्य एवं औषधी प्रशासन विभाग के आयुक्त तुकाराम मुंंढे के अमरावती दौरे को लेकर नागरिकों की उम्मीदें बढ गई है. राज्य भर में उनकी कार्यशैली की चर्चा होती रही है. ऐसे में अमरावती जिले के इस कथित पानी कारोबार की जांच होगी या नहीं, इस पर सभी की नजर टिकी है.
स्वास्थ्य से सीधे जुडे इस व्यवसाय में यदि किसी प्रकार की अनियमितता हो रही है, तो उस पर कठोर कार्रवाई आवश्यक है. अन्यथा स्थिती ऐसी ही बनी रहेगी की बोतल बदली, नाम बदला, लेकिन पानी और नंबर वहीं रहा, जिससे उपभोक्ताओं का भरोसा कमजोर होगा. अब कई महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आ रहे है. जैसे एक ही कारखाना, कई ब्रांड और एक ही एफएसएसएसएआई नंबर के पिछे आखिर क्या कारण है? क्या सभी नियमों का पालन किया जा रहा है? क्या उपभोक्ताओं को गुमराह किया जा रहा है? क्या संबंधित विभाग को इसकी जानकारी नहीं है, या जानकारी होने के बावजूद अनदेखी की जा रही है?

* जांच के प्रमुख बिंदू
एक ही एफएसएसएसएआई नंबर पर कितने ब्रांड बाजारों में बेचे जा रहे है?, क्या अलग-अलग नामों से बोतले बेचने की अनुमती है?, घरेलु स्थानों से होने वाली पानी की आपूर्ति की जांच की गई है या नहीं? खाद्य एवं औषधी प्रशासन ने अब तक कितने नमुनों की जांच की है?, अब तक कोई बडी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

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