ऑरेंज गोली का दौर ढला, डार्क चॉकलेट का बढ़ा क्रेज़
चॉकलेट डे विशेष

अमरावती/दि.7- कभी 25 पैसे में मिलने वाली ऑरेंज गोली, पेपरमिंट और इमली कैंडी बच्चों की पहली पसंद हुआ करती थीं, लेकिन समय के साथ मिठास का स्वाद बदल गया है. आज डार्क चॉकलेट, ड्राई फ्रूट चॉकलेट और शुगर-फ्री चॉकलेट ने बाजार में अपनी अलग पहचान बना ली है. चॉकलेट डे के अवसर पर बाजार में हर उम्र के लोगों में चॉकलेट खरीदने का उत्साह देखने को मिल रहा है.
बाजार में अब 1 रुपये से लेकर 250 रुपये तक की चॉकलेट उपलब्ध हैं. गांवों में आज भी ऑरेंज गोली, बोरकूट गोली, खोबरा गोली और गुड़ से बनी कैंडी मिलती हैं, जबकि शहरों में डार्क चॉकलेट, हेज़लनट, ओरियो स्टिक, मार्शमैलो, जेली कैंडी और प्रीमियम ड्राई फ्रूट चॉकलेट की मांग तेजी से बढ़ी है. पॉपिंस और जेम्स जैसी पारंपरिक चॉकलेट आज भी बच्चों के बीच लोकप्रिय बनी हुई हैं.
* डार्क चॉकलेट क्यों बन रही है पसंद?
स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण लोग अब डार्क और शुगर-फ्री चॉकलेट को अधिक पसंद कर रहे हैं. अच्छी गुणवत्ता वाली डार्क चॉकलेट में फ्लेवोनॉयड्स जैसे एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर की कोशिकाओं की सुरक्षा करने, रक्तचाप नियंत्रित रखने और रक्त संचार बेहतर बनाने में मददगार माने जाते हैं. साथ ही चॉकलेट से सेरोटोनिन हार्मोन का स्तर बढ़ने से तनाव कम होता है और मूड बेहतर होता है.
* महंगी हुई प्रीमियम चॉकलेट
सूखे खजूर, बादाम, पिस्ता और काजू से तैयार ड्राई फ्रूट चॉकलेट की कीमत 25 से 40 रुपये या उससे अधिक तक पहुंच गई है. वहीं प्रीमियम ब्रांड की चॉकलेट 200 से 250 रुपये तक में बिक रही हैं, जिससे ये आम उपभोक्ताओं की पहुंच से कुछ दूर हो जाती हैं.
* डॉक्टरों की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि सीमित मात्रा में डार्क चॉकलेट का सेवन लाभदायक हो सकता है, लेकिन मिल्क चॉकलेट और अधिक चीनी वाली चॉकलेट का अत्यधिक सेवन मोटापा, दांतों की सड़न, अपच और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है. खासकर बच्चों को चॉकलेट देने के बाद उनके दांतों की सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए. कुल मिलाकर, बदलती जीवनशैली और स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के बीच डार्क चॉकलेट का चलन लगातार बढ़ रहा है, जबकि पारंपरिक ऑरेंज गोली और पेपरमिंट अब धीरे-धीरे बाजार से गायब होती नजर आ रही हैं.





