एफडीए की 13 जगह छापेमारी, 26 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर
डिटर्जेंट-शैंपू मिलाकर बना रहे थे नकली दूध

* 11.48 करोड का माल जब्त, 20 हजार लीटर नकली दूध नष्ट
* 13 आरोपी गिरफ्तार
मुंबई /दि.7- राज्य में खाद्य मिलावट के खिलाफ अब तक सबसे बडी कार्रवाई में खाद्य एवं औषधी प्रशासन (एफडीए) और पुणे ग्रामीण पुलिस की स्थानीय अपराध शाखा ने नकली (सिंथेटिक) दूध बनानेवाले एक बडे गिरोह का भांडाफोड किया है. जांच में सामने आया कि, गिरोह डिटर्जेंट, शैंपू, पाम ऑयल, स्किम्ड मिल्क पावडर, व्हेडेयरी परमीट पावडर और इमल्सीफायर जैसे रसायनों को मिलाकर नकली दूध तैयार करता था. इसके बाद इसे असली दूध में मिलाकर बाजार में बेचा जाता था.
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने बताया कि, खुफिया सूचना के आधार पर ठाणे, पुणे, अहिल्या नगर, सोलापुर और जालना के 13 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई. यह कार्रवाई मिलावट में इस्तेमाल होनेवाले रसायन, दूध संग्रह केंद्र, चिलिंग प्लांट, प्रोसेसिंग यूनिट और वितरण नेटवर्क पर की गई है. इस कार्रवाई में 11.48 करोड रुपए मूल्य की सामग्री और संपत्ति जब्त की गई और करीब 20 हजार लीटर संदिग्ध सिंथेटिक दूध नष्ट करके नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे. पांच खाद्य कारोबारियों के लाईसेंस रद्द किए गए और चार प्रतिष्ठान बंद कर दिए गए. इस मामले में 26 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई. जिनमें से 13 को गिरफ्तार कर लिया गया.
* इस तरह तैयार किया जाता था दूध
– आरोपी पानी, स्किम्ड मिल्क पावडर और व्हे पावडर मिलाकर दूध के ठोस तत्व तैयार करते थे.
– इसके बाद प्राकृतिक दूध की मलाई की जगह पर पाम ऑयल, मिश्रण को स्थिर रखने के लिए इमल्सीफायर, ताजा दूध जैसा झाग और बनावट देने के लिए डिटर्जेंट और शैंपू मिलाते थे.
– तैयार सिंथेटिक दूध असली दूध में मिलाकर कम लागत में भारी मुनाफा कमाया जा रहा था.
* नकली दूध मामले में आरोपी की संख्या हुई 26
पुणे जिले के मंचर इलाके में नकली दूध बनाने के मामले में 13 और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. मंचर पुलिस थाने में कुल 26 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. पकडे गए आरोपियों में मुख्य आरोपी भी शामिल है. लेकिन पुलिस ने अभी तक अधिकृत रुप से आरोपियों के नाम और अन्य जानकारी जारी नहीं की है. एफडीए द्वारा की गई कार्रवाई में 2 लाख 4 हजार 490 रुपए का माल और 1 हजार 185 किलो ग्राम मिलावटी सामग्री जब्त की गई है. जांच में सामने आया है कि, आरोपियों ने आर्थिक फायदे के लिए विभिन्न रसायनों का उपयोग करके कृत्रिम दूध तैयार किया और उसका भंडारण, परिवहन व बिक्री की. मंचर पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा इस रैकेट से जुडे अन्य लोगों की तलाश भी जारी है.
* वित्तिय लेन-देन की जांच कर रही पुलिस
जांच एजेंसियों ने सुशांत बबनराव हिंगे को इस गिरोह का मुख्य सरगना और संदीप लोबा को नेटवर्क का समन्वयक बताया है. जांच में यह भी सामने आया है कि, मिलावटी सामग्री किसानों, दूध संग्रह केंद्रों, चिलिंग यूनिट और पैकेजिंग केंद्रों तक नियमित रुप से पहुंचाई जाती थी. अब जांच एजेंसियां वित्तिय लेन-देन, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और अंतरराज्यीय नेटवर्क की भी पडताल कर रही है.





