लवासा मामले में पवार परिवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत

सीबीआई जांच और एफआईआर की मांग वाली याचिका खारिज

* अदालत ने याचिकाकर्ता की मंशा पर भी उठाए सवाल
नई दिल्ली/मुंबई/दि.16- महाराष्ट्र के बहुचर्चित लवासा हिल स्टेशन परियोजना मामले में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार, सांसद सुप्रिया सुले तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. सर्वोच्च न्यायालय ने परियोजना में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच कराने और संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता की मंशा पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि मामले में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं बनता. अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इस प्रकरण में आगे कोई दखल नहीं देगी. इस फैसले को पवार परिवार के लिए महत्वपूर्ण कानूनी राहत माना जा रहा है.
* क्या था पूरा मामला?
नाशिक के पत्रकार एवं अधिवक्ता नानासाहेब जाधव ने मुंबई हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. याचिका में आरोप लगाया गया था कि लवासा परियोजना के विकास के दौरान तत्कालीन सत्ता से जुड़े प्रभावशाली लोगों ने अपने पदों का दुरुपयोग कर कंपनी को लाभ पहुंचाया. याचिकाकर्ता का दावा था कि परियोजना के लिए सरकारी जमीन रियायती दरों पर उपलब्ध कराई गई, आवश्यक अनुमति प्रक्रियाओं से पहले बड़े पैमाने पर भूमि खरीदी गई तथा इससे सरकारी खजाने को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. इन आरोपों के आधार पर सीबीआई जांच और आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की गई थी.
* हाईकोर्ट ने भी खारिज की थी याचिका
इससे पहले फरवरी 2022 में मुंबई हाईकोर्ट ने भी जनहित याचिका को खारिज कर दिया था. हाईकोर्ट ने कहा था कि आरोपों को लेकर याचिका काफी विलंब से दायर की गई है और परियोजना का बड़ा हिस्सा विकसित हो जाने के बाद हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा. राज्य सरकार ने भी अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह परियोजना विकसित की गई तथा सभी आवश्यक मंजूरियां कानूनी प्रक्रिया के तहत प्रदान की गई थीं. सुप्रीम कोर्ट ने अब हाईकोर्ट के इसी निर्णय को बरकरार रखते हुए याचिका को खारिज कर दिया है.
* राजनीतिक प्रतिक्रियाएं शुरू
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने निर्णय का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि मुंबई हाईकोर्ट पहले ही इस याचिका को खारिज कर चुका था और मामले में कोई ठोस आधार नहीं था. तटकरे ने इसे न्यायपालिका की मजबूती का उदाहरण बताते हुए कहा कि राजनीतिक उद्देश्य से लगाए गए आरोपों पर अब पूर्ण विराम लग गया है.
* लंबे समय से चर्चा में रहा है लवासा प्रोजेक्ट
बता दे कि, पुणे जिले में विकसित लवासा परियोजना कई वर्षों से राजनीतिक और कानूनी विवादों का केंद्र रही है. पर्यावरणीय मंजूरियों, भूमि अधिग्रहण और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर समय-समय पर विभिन्न मंचों पर सवाल उठाए जाते रहे हैं. हालांकि, ताजा फैसले के बाद इस मामले में सीबीआई जांच और एफआईआर की मांग को न्यायिक स्तर पर बड़ा झटका माना जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के साथ लवासा प्रकरण को लेकर चल रही एक महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाई का फिलहाल अंत हो गया है.

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