सबसे बड़ी नकली गुटखा फैक्टरी पर छापा

अकोला एमआईडीसी में करोड़ों के काले कारोबार का भंडाफोड़

* एमआयडीसी के अकोला ग्रोथ सेक्टर में धडल्ले के साथ चल रहा था नकली गुटखे का कारखाना
* विमल, पान बहार, वाह, रेडलेबल व रिच-10 ब्रांडवाले गुटखे का हो रहा था उत्पादन
* 70 लाख रूपयों से अधिक मूल्यवाली नकली सुपारी, मशिनें, कंपनियों के खाली पाऊच व रेपर जब्त
* नामी-गिनामी कंपनियों के नाम पर बनाया जा रहा था नकली गुटखा, अकोला से पूरे विदर्भ में हो रही थी नकली गुटखे की सप्लाय
* तीन नाबालिग सहित चार गिरफ्तार, फैक्टरी का मालिक सहित गुटखा तस्करों की सरगर्मी से तलाश
* सुनियोजित तरीके से पूरी फैक्टरी का हुआ भंडाफोड, 30 से अधिकारी सुबह पहुंचे थे
* अकोला, अमरावती व वाशिम की एफडीए टीमों ने पुलिस के साथ मिलकर मारा छापा
* आरोपियों पर शिकंजा कसने की तैयारी, मकोका लगाने पर भी होगा विचार
अकोला/दि.16- आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे द्वारा अन्न व औषधी प्रशासन विभाग के आयुक्त के तौैर पर पदभार संभालने के बाद से ही एफडीए विभाग द्वारा मिलावटखोरों सहित प्रतिबंधित गुटखे की तस्करी व विक्री करनेवाले गुटखा माफियाओं के खिलाफ जबरदस्त ढंग से मोर्चा खोला गया है. जिसके तहत राज्य भर में मिलावटखोरों व गुटखा तस्करों के खिलाफ धडाधड कार्रवाईयां की जा रही है. इसी श्रृंखला के तहत अकोला एमआयडीसी के ग्रोथ सेक्टर क्षेत्र में विगत कई वर्षों से प्रशासन की आंखों में धूल झोंकते हुए चल रहे नकली गुटखे के विशाल अवैध साम्राज्य पर आखिरकार खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) और पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए करारा प्रहार किया है. संयुक्त छापेमारी में करोड़ों रुपये के कारोबार का पर्दाफाश हुआ है तथा मौके से 70 लाख रुपये से अधिक मूल्य की नकली सुपारी, तैयार माल, अत्याधुनिक मशीनें, ब्रांडेड कंपनियों के पाउच, रेपर, लेबल और पैकेजिंग सामग्री जब्त की गई है. जांच एजेंसियों का मानना है कि यह केवल एक फैक्टरी नहीं, बल्कि पूरे विदर्भ में फैले नकली गुटखा नेटवर्क का प्रमुख केंद्र था, जहां से विभिन्न जिलों में बड़े पैमाने पर माल भेजा जाता था. कार्रवाई के बाद पूरे विदर्भ के गुटखा माफियाओं में हड़कंप मच गया है.
* नामी ब्रांडों की आड़ में चल रहा था मौत का कारोबार
छापेमारी के दौरान जो सामग्री बरामद हुई है, उससे पता चलता है कि फैक्टरी में विमल, पान बहार, वाह, रेड लेबल और रिच-10 जैसे चर्चित ब्रांडों की हूबहू पैकिंग तैयार कर नकली उत्पाद बाजार में उतारे जा रहे थे. सूत्रों के अनुसार, आम उपभोक्ता असली और नकली उत्पाद में अंतर तक नहीं कर सकता था. यही कारण है कि अकोला में बनने वाले नकली गुटखे की इस खेप को बड़ी आसानी से पूरे विदर्भ क्षेत्र के बाजारों में खपाया जा रहा था. साथ ही विगत कई वर्षों से चल रहे नकली गुटखे के इस कारोबार में अब तक हजारों-लाखों करोडों रूपयों का वारा-न्यारा भी किया गया.
* मुंबई से मिली सूचना, 30 अधिकारियों ने एक साथ बोला धावा
जानकारी के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क की सूचना पहले मुंबई स्तर पर जांच एजेंसियों तक पहुंची थी. वहां से मिले इनपुट के आधार पर जलगांव होते हुए मामला अकोला एफडीए तक पहुंचा. इसके बाद कई दिनों तक गुप्त निगरानी और जानकारी एकत्र करने का काम किया गया. जैसे ही पर्याप्त साक्ष्य जुटे, वैसे ही आज गुरुवार 16 जुलाई की सुबह अकोला, अमरावती और वाशिम की एफडीए टीमों ने पुलिस बल के साथ संयुक्त कार्रवाई को अंजाम दिया. करीब 30 अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम ने एक साथ परिसर को घेर लिया और घंटों तक चली तलाशी में भारी मात्रा में अवैध सामग्री बरामद की. सूत्र बताते हैं कि कार्रवाई को पूरी तरह गोपनीय रखा गया था ताकि किसी भी आरोपी को भनक न लग सके और साक्ष्य नष्ट करने का मौका न मिले.
* तीन नाबालिगों सहित चार गिरफ्तार, मास्टरमाइंड फरार
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने तीन नाबालिगों सहित चार लोगों को हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया है. पूछताछ में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है. वहीं फैक्टरी के मुख्य संचालक सहित नकली गुटखे के उत्पादन व वितरण से संबंधित प्रमुख लोगों की तलाश में विशेष टीमें रवाना कर दी गई हैं. जांच एजेंसियों का मानना है कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे संगठित तरीके से काम करने वाला एक बड़ा गिरोह सक्रिय है.
* वर्षों से चल रहा था कारोबार, आखिर अब तक नजर कैसे नहीं पड़ी?
इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि एमआईडीसी जैसे औद्योगिक क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर नकली गुटखा निर्माण का कारोबार आखिर वर्षों तक कैसे चलता रहा? स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि फैक्टरी लंबे समय से संचालित थी और यहां से हजारों-लाखों पाउच प्रतिदिन विभिन्न जिलों में भेजे जाते थे. यदि यह दावा जांच में सही साबित होता है, तो अब तक करोड़ों रुपये का अवैध कारोबार हो चुका होगा. नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि केवल फैक्टरी संचालकों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जांच होनी चाहिए कि इतने बड़े अवैध कारोबार की जानकारी संबंधित तंत्र को क्यों नहीं हुई और यदि हुई थी तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई.
* पूरे विदर्भ में फैला था सप्लाई नेटवर्क
जांच एजेंसियों को संदेह है कि अकोला से तैयार नकली गुटखा केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं था. इसकी सप्लाई अमरावती, वाशिम, बुलढाणा, यवतमाल, अकोट, मलकापुर और अन्य जिलों तक की जा रही थी. अधिकारियों ने जब्त दस्तावेजों, मोबाइल फोन, लेन-देन संबंधी रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी है. इससे पूरे नेटवर्क के आर्थिक और वितरण तंत्र का खुलासा होने की संभावना है.
* मकोका सहित कठोर धाराए लगाने पर मंथन
मामले की गंभीरता और नेटवर्क के संभावित विस्तार को देखते हुए जांच एजेंसियां आरोपियों पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) लगाने की संभावना पर विचार कर रही हैं. यदि जांच में यह सिद्ध हो जाता है कि यह एक संगठित और लगातार संचालित आपराधिक नेटवर्क था, तो आरोपियों के खिलाफ मकोका सहित अन्य कठोर कानूनी प्रावधान लागू किए जा सकते हैं. इससे आरोपियों के लिए जमानत और कानूनी राहत प्राप्त करना भी बेहद कठिन हो जाएगा.
* अभी और बड़े खुलासों की उम्मीद
जांच अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल शुरुआत है. गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ, वित्तीय लेन-देन की जांच, मोबाइल डेटा विश्लेषण और सप्लाई चेन की पड़ताल के बाद कई और नाम सामने आ सकते हैं. अकोला की इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर करोड़ों रुपये कमाने वाले ऐसे नेटवर्क आखिर कितनी गहराई तक फैले हुए हैं. अब पूरे विदर्भ की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच एजेंसियां इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचकर कितने बड़े खुलासे करती हैं और कितने लोगों पर कानून का शिकंजा कसता है.
* कार्रवाई में इन अधिकारियों का रहा समावेश
अकोला एमआयडीसी स्थित कारखाने में नकली गुटखे के उत्पादन का भंडाफोड करने हेतु की गई कार्रवाई में अकोला सहित अमरावती व वाशिम के एफडीए विभाग की टीमों द्वारा हिस्सा लिया गया. जिनमें अकोला एफडीए के देवानंद वीर, रविंद्र सोलंके व बोरचाटे तथा अमरावती एफडीए के गजानन गोरे, घनश्याम दंदे व अनुराग चव्हाण सहित वाशिम एफडीए के अधिकारियों व कर्मचारियों का समावेश रहा.

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